आजमगढ़ रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन का तमगा मिला है लेकिन यहां बुनियादी यात्री सुविधाओं का भी टोटा है। प्लेटफार्म नंबर एक की टिन शेड टूटी हुई है। कैंटीनों में रेल नीर के बजाय लोकल पानी की बोतलें बिकती हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए प्लेटफार्म बदलने कोई व्यवस्था नहीं है। आजमगढ़ रेलवे स्टेशन से दिल्ली, मुंबई, गुजरात, कोलकात आदि जगहों के लिए ट्रेनों का संचालन होता है। प्रतिदिन यहां से हजारों यात्री आते-जाते हैं। मगर यहां यात्री सुविधा का अभाव है। एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म जाने के लिए पैदल ओवरब्रिज बना है। लेकिन दिव्यांग यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उनको परिवार के लोग गोद में उठाकर दूसरे प्लेटफार्म तक ले जाते हैं। इतना ही नहीं प्लेटफार्म नंबर एक की टिनशेड जगह-जगह से टूटा हुआ है। यात्रियों के बैठने के स्थान पर पंखे तक नहीं हैं। पानी पीने के लिए लोगो को धूप में जाना पड़ता है। स्टेशन पर बंदरों की भी भरमार है। यात्रियों को उनसे अपने सामान की सुरक्षा करनी पड़ती है। कैंटीन संचालकों को रेल नीर की ही बिक्री करनी है लेकिन वहां रेल नीर के बजाय दूसरी कंपनियों का पानी मिलता है। बिजली कटने पर रात में स्टेशन पर अंधेरा पसर जाता है। यहां जेनरेटर चलाया ही नहीं प्लेटफार्म पर शौचालय है लेकिन स्टेशन के बाहर की तरफ एक भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। लोग बाहर खुले में शौच करते हैं, जिससे सर्कुलेटिंग एरिया में दुर्गंध रहती है।