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जल जीवन मिशन: आठ परियोजनाएं पूरी, बाकी सब अधूरी

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ग्रामीण क्षेत्र की आबादी को मार्च 2024 तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो पाना मुश्किल है। जल जीवन मिशन का अभी तक आठ जगहों पर ही सभी काम पूरे हुए हैं। जबकि 65 जगहों पर कार्यदायी संस्था ने ओवर हेड टैंक का कार्य पूरा नहीं किया है। जिसके कारण यहां पर पंप से सीधे लोगों के घरों तक पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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जल जीवन मिशन योजना के तहत जनपद में कुल 1459 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इन परियोजनाओं को पूरा करने में लगभग 3400 सौ करोड़ खर्च होंगे। चयनित राजस्व गांवों में ओवर हेड टैंक, पंप हाउस का निर्माण कराकर व गांवों में घरों तक पाइप लाइन बिछाकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। यहां पर फेज 2 से वर्ष 2019 में काम शुरू हुआ। शुरूआती दौर में तो दो ही कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन मार्च 2023 से पांच और कार्यदायी संस्थाओं को लगाया गया है। अब कुल सात कार्यदायी संस्थाएं कार्य कर रहीं हैं, बावजूद इसके कार्य की गति रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। हाल यह है कि अभी तक मात्र आठ परियोजनाएं ही पूरी हो पाई हैं। यहां पर लोगों को ओवर हेड टैंक से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा 65 परियोजनाएं ट्रायल एंड रन में हैं। यहां पर पंप द्वारा सीधे पानी की आपूर्ति की जा रही है। बाकी की 1391 परियोजनाएं अभी अधूरी हैं।
7086 किमी ही बिछाई जा सकी पाइप लाइन
इस योजना के तहत जिले में 18603 किमी पाइप लाइन बिछाई जानी है, लेकिन अब तक कार्यदायी संस्थाओं ने मात्र 7086 किमी ही पाइप लाइन बिछाई जा सकी है। इसके अलावा 1280 जगहों पर बोरिंग का काम पूरा हुआ है। 185 जगहों पर पंप हाउस बना है। कार्यदायी संस्थाओं के सुस्ती के कारण मार्च 2024 तक हर घर को नल से जल मिल पाना मुश्किल है। संवाद
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पहले दो ही कार्यदायी संस्थाएं काम कर रही थीं, जिसके कारण काम में देरी हुआ है। इस वर्ष मार्च के बाद से पांच और कार्यदायी संस्थाएं काम में लगाई गई हैं। बराबर काम की समीक्षा भी हो रही है ताकि कार्य समय से पूरा हो सके।
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- हेमंत सिंह, अधिशासी अभियंता, जल जीवन मिशन।
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