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अस्तित्व विहीन मदरसों की पूरी नहीं हो सकी जांच

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आजमगढ़। जिले में कई ऐसे मदरसे संचालित हो रहे हैं जिनका मौके पर कोई अस्तित्व ही नहीं है और सरकार से लाभ उठा रहे हैं। इन मदरसों की जांच के लिए कमेटी तो बनी लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। जांच पूरी न होने के कारण मदरसों पर होने वाली आगे की कार्रवाई रुकी हुई है। ये मदरसे आधुनिकीकरण के नाम पर सरकारी धन का बड़े पैमाने पर बंटरबाट कर रहे हैं। अल्पसंख्यक विभाग के आंकड़ों के अनुसार वैसे तो जिले में 387 मदरसे संचालित होते हैं लेकिन 255 ऐसे मदरसे है जो अनुदानित हैं। सरकार इन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर आधुनिक शिक्षा के साथ ही अन्य सुविधाएं देने के लिए हर साल लाखों रूपए पानी की तरह बहा रही है। जिले में कई मदरसे तो मानक को पूरा करते हैं लेकिन कुछ मदरसे तो ऐसे हैं तो अस्तित्व में ही नहीं हैं या मानक को पूरा नहीं कर रहे हैं। केवल वह कागजों पर संचालित हो रहे हैं और सरकारी बजट का दुरूपयोग कर रहे हैं। ऐसे मदरसों के खिलाफ कई बार जिला प्रशासन व शासन में शिकायत भी हो चुकी है। इन मदरसों पर अब सरकार की नजर टेढ़ी हो गई है। जिले में जिस क्षेत्र में मदरसे संचालित हो रहे हैं। उनकी स्थलीय जांच के लिए जिलाधिकारी के आदेश पर नगर क्षेत्र में एसडीएम के नेतृत्व में नगर शिक्षा अधिकारी, अधिशासी अधिकारी द्वारा नामित अवर अभियंता व ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम के नेतृत्व में खंड शिक्षा अधिकारी, बीडीओ द्वारा नामित अवर अभियंता की टीम जांच के लिए गठित की गई है लेकिन दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी मदरसों की जांच पूरी नहीं हो सकी है। मदरसों की जांच पूरी न होने के कारण ये आगे की कार्रवाई से बचते जा रहे हैं। जिला अल्पसंख्या कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने बताया कि कुछ जगहों पर जांच की जा चुकी है लेकिन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जांच के लिए पुन: रिमाइंडर भेजा जा रहा है। मदरसों की स्थलीय जांच जल्द ही पूरी हो जाएगी।
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