गाजियाबाद में हुई दुर्घटना के बाद भले ही शासन सख्त है, लेकिन अभी भी जनपद में ऐसे तमाम स्कूल वाहन हैं, जो मानक विहीन हैं। जिन्हें स्कूल संचालक धड़ल्ले से सड़कों पर चलवा रहे हैं। ऐसे वाहनों पर विभाग अंकुश लगाने की तैयारी में है। परिवहन विभाग ने स्कूल खुलने से पहले ही वाहन संचालकों को नोटिस जारी किया है।
जिले में 1076 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। करीब-करीब सभी अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में बच्चों के लिए वाहन की व्यवस्था की गई है। इनमें कुछ स्कूलों के वाहन तो मानक के हिसाब से हैं, लेकिन अधिकतर स्कूल संचालक अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को आवागमन के लिए पुराने वाहनों को लगाए हुए हैं। इन वाहनों में पर्दे तक नहीं है। बच्चों की सुरक्षा के लिए दरवाजे खिड़की के पास जाली भी नहीं लगी हैं। इससे बच्चे खिड़की से बाहर सिर निकालकर ताक-झांक करते रहते हैं। अधिकतर स्कूलों में वाहन मानक को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, जो किसी दिन बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकती है। हालांकि शासन की सख्ती के बाद फिर से अभियान शुरु हो गया है। स्कूल संचालकों को नोटिस जारी कर उन्हें स्कूल खुलने से पहले फिटनेस कराने के लिए कहा गया है।
स्कूल बस के यह हैं मानक
- बच्चों को पकड़ने के लिए सीट के पीछे हैंडिल।
- खिड़की पर जाली लगी हो।
- बच्चों के बैग रखने की व्यवस्था हो।
- चालक और कंडक्टर वर्दी में हों।
- वाहन के आगे-पीछे स्कूल का नाम, चालक, कंडक्टर व स्कूल प्रबंधन का फोन नंबर होना चाहिए।
- वाहन का रंग पीला हो।
- चालक के साथ कंडक्टर हो।
- निर्धारित सीट के अनुसार बच्चे बैठें।
- फर्स्ट एड बाक्स और अग्निशमन यंत्र हो।
- पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर हो।
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करीब 250 वाहन संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। उन्हें स्कूल खुलने से पूर्व वाहन का फिटनेस कराना होगा। यदि नहीं कराते हैं तो वाहनों को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं 15 साल चल चुके 150 वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
- सतेंद्र कुमार यादव, एआरटीओ प्रशासन।