सरकार की ओर से गरीबों को पांच लाख रुपये तक के इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की गई लेकिन कोरोना काल में यह योजना आयुष्मान कार्ड धारकों को आयुष्मान बनाने में नाकाम रही है। आयुष्मान कार्ड धारक भी आपाधापी के दौर में इसका लाभ उठाने से वंचित रह गए। अस्पतालों के भारी भरकम बिल अदा कर घर जा चुके हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक उनका आंकड़ा जुटाया है। हालांकि अभी यह भी नहीं स्पष्ट हो सका है किस प्रकार उनके पैसे को वापस किया जाएगा। जनपद में सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 17756 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। सरकार की ओर से गरीबों को इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई है। जिसके तहत लाभार्थियों का गोल्डेन कार्ड बनाया गया है। जिले में 42 अस्पतालों का चयन किया गया है। जिसमें 25 सरकारी और 17 प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं। जहां आयुष्मान कार्ड धारक पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त कर सकते हैं। इनमें से तीन अस्पतालों को कोविड अस्पताल और एक को नान कोविड अस्पताल में तब्दील किया गया था। इन अस्पतालों में कोरोना संक्रमण काल में लोगों को बेड मिलना भी मुश्किल हो गया था। लोग एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ रहे थे। आपाधापी के इस दौर में किसी भी कार्ड धारक को इस योजना का ख्याल तक नहीं आया। बहुत से लोगों ने सरकारी तो बहुत से लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में अपना उपचार कराया। उपचार के बाद प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती लोग स्वस्थ होने के बाद भारी भरकम बिल जमा कर घर भी जा चुके हैं। वहीं इन लोगों को योजना का लाभ पहुंचाने वाले अभी तक उनका आंकड़ा जुटाने में ही जुटे हुए हैं। ऐसे कितने कार्डधारकों ने अपना उपचार कराया इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है।