आजमगढ़। डाकिया को पता अथवा घर पर आवेदक न मिलने पर ड्राविंग लाइसेंस वापस लखनऊ स्थित परिवहन मुख्यालय भेज दिया जाता था। ऐसे में लाइसेंस के लिए लोगों को चक्कर काटने पड़ते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। किसी वजह से घर पर लाइसेंस न पहुंचने पर आरटीओ कार्यालय से इसे प्राप्त किया जा सकेगा। परिवहन विभाग के इस पहल से लोगों को काफी राहत मिलेगी। लाइसेंस बनवाने के लिए दो बार टेस्ट देना पड़ता है। पहले लर्निंग लाइसेंस के लिए टेस्ट होता है। इसमें पास होने के बाद एक माह से छह माह के बीच स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रैक पर वाहन चलाकर दिखाना पड़ता है। टेस्ट में पास होने के बाद अधिकतम 15 दिनों में परिवहन मुख्यालय से आवेदक के घर के पते पर लाइसेंस भेज दिया जाता है। महीना गुजरने के बाद भी काफी लोगों के पास लाइसेंस नहीं पहुंचने पर उनको आरटीओ के चक्कर काटने पड़ते थे।यहां जवाब मिलता है कि इंतजार करें, मुख्यालय से लाइसेंस सीधे घर पहुंचेगा। ऐसे में असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। अब मुख्यालय पहुंचने पर लाइसेंस को वापस आरटीओ कार्यालय भेजा जा रहा है। एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव का कहना है कि जिन लोगों के घरों पर लाइसेंस नहीं पहुंचे हैं, निर्धारित समय के बाद आरटीओ में संपर्क कर सकते हैं। मुख्यालय से लाइसेंस आने पर दस्तावेज दिखाने के बाद उनको लाइसेंस मिल जाएगा।