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Azamgarh News: गूंजती रहीं या हुसैन की दर्द भरी सदाएं

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चौक स्थित इमामबारगाह तस्कीने ज़ैनब से सुबह मजलिस के बाद ताबूत, अलम, ताज़िया व ज़ुलजनाह का जुलूस निकला। जो अपने कदीम रास्तों से होता हुआ खरेवां स्थित सदर इमामबाड़ा पहुंचा। जहां पर कर्बला के 72 शहीदों के ताबूतों की जियारत की गई। जिसका परिचय कराते हुए सैय्यद ज़ीशान अली निज़ामाबादी ने उन पर होने वाली ज़ुल्म व दर्दनाक शहादत को बयान किया, तो अजादार रो पड़े।
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पहली मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मासूम असगर साहब ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन ने 1400 साल पहले कर्बला के मैदान में जो पैगाम दिया था। वह आज हमारे मुल्क के लोगों को समझने और सीखने की ज़रूरत है। मुख्य चौक पर तकरीर करते हुए मौलाना सैय्यद आरज़ू हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन इन्सानियत के सबसे क़ीमती सरमाया का नाम है। तारीखे इन्सानियत में जितनी अज़ीम हस्ती गुज़री है और दुनिया के तमाम मज़हब के जो आईडियल हैं। अगर उनको इकट्ठा किया जाए, तो इमाम हुसैन के अंदर वह तमाम खूबियां पाई जाती हैं।
रौज़ा सैय्यद अली आशिकान सरायमीर में मुम्बई से आये मौलाना अली असग़र हैदरी ने कहा कि हजरत अली की बेटी ज़ैनब ने यज़ीद के दरबार में जो खुतबा दिया था, वह बातिल ताकतों को आईना दिखाने के साथ साथ हुसैनी मिशन की कामयाबी और दीने मोहम्मदी के उसूलों की जीत का ऐलान है। जुलूस का संचालन सागर आज़मी व मोहम्मद हुसैन सरायमीरी ने किया। अंत में शिया कमेटी के अध्यक्ष क़ायम रज़ा ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।
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