आजमगढ़। बसपा शासन काल (2008-2009) में मुबारकपुर से सटे गजहड़ा और मेंहनगर में करोड़ों रुपये की लागत से कांशीराम आवासों का निर्माण कराया गया। कार्यदायी संस्था ने निर्माण तो कराया लेकिन यहां पर बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं की। इसके कारण इस भवन को डूडा ने हैंडओवर नहीं लिया। बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां किसी को आवास का आवंटन नहीं हो सका है। करोड़ों की लागत से बने 700 आवास खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। वहीं खाली पड़े यह भवन जहां अपराधियों का ठिकाना बन रहे हैं वहीं कुछ लोगों ने इसमें कब्जा भी जमा लिया है।
मेंहनगर में 20 ब्लाकों में बने हैं 240 आवास
मेंहनगर। तहसील मुख्यालय से मात्र चार किमी दूर देवरिया गांव में कांशीराम आवासों का निर्माण कराया गया। कार्यदायी संस्था उप्र प्रदेश आवास विकास परिषद ने भवन का निर्माण तो किया लेकिन बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं की। कार्यदायी संस्था ने जब उसे हैंडओवर करना चाहा तो 29 सितंबर 2015 को तत्कालीन एडीएम प्रशासन ने इसका निरीक्षण किया था और बिजली के साथ पानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। न तो यह भवन हैंडओवर हुआ और ना ही किसी को आवंटन किया गया। अलबत्ता खाली पड़े इस भवन को कुछ लोगों ने अवैध रूप से अपना ठिकाना बना रखा है।
हैंडओवर हुए बिना ही 175 लोगों को हुआ आवंटन
मुबारकपुर। मुबारकपुर के गजहड़ा में 460 आवासों का निर्माण कराया गया। कार्यदायी संस्था आवास विकास द्वारा यहां भी बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं की गई। जिसके कारण यह भवन भी हैंडओवर नहीं हो पाए। इसके बाद भी इसमें रहने वाले लोगों ने बताया कि इसमें कुल 175 लोगों को आवास का आवंटन डूडा द्वारा कर दिया गया है। इनमें 60 लोग ऐसे हैं जो कटिया कनेक्शन के सहारे बिजली का उपभोग कर रहे हैं। पानी की व्यवस्था इनके द्वारा अगल बगल लगे इंडिया मार्का टू हैंडपंप से की जाती है। एक आवास की आस में सिराजुद्दीन इसकी देखभाल करते हैं।
मुबारकपुर और मेंहनगर में बने कांशीराम आवासों के आवंटन को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि यहां पर पानी और बिजली की व्यवस्था कर लोगों को आवंटन किया जाएगा। जिसके लिए पीओ डूडा को निर्देशित कर दिया गया है। - आजाद भगत सिंह, प्रभारी अधिकारी, नगरीय निकाय