महिलाओं के विकास, सशक्तिकरण और उन्हें स्वावलंबी बनाना अब हिना देसाई के जीवन का उद्देश्य बन गया है। दस वर्षों में वह घरेलू हिंसा से पीड़ित लगभग एक हजार महिलाओं को इंसाफ दिला चुकी हैं और उन्हें स्वावलंबी बना रही हैं।
गुजरात के सूरत की रहने वाली हिना देसाई गुजरात में ही चेबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री में सचिव थी। नौकरी छोड़कर 10 वर्ष पूर्व 2006 में सगड़ी तहसील क्षेत्र के जोकहरा स्थित श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय में निदेशिका के पद पर तैनात हुईं।
यहां महिलाओं पर हो रही हिंसा से से विचलित हो गई। उन्होंने महिला हिंसा और घरेलू हिंसा के साथ ही महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करना शुरू किया। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई कढ़ाई के साथ पेपर बैग, फाइल, फोल्डर बनाना और सिखाना शुरू किया।
ग्रामीण क्षेत्र देवारा में जब पुरुष बाहर नौकरी पर जाते हैं तो महिलाओं को कृषि का काम भी करना पड़ता है। इसके लिए इन महिलाओं को तकनीकी जानकारी भी देती हैं। जिन महिलाओं को उन्होंने घरेलू हिंसा से इंसाफ दिलाया। उनमें मेघपुर की सुनैना, जोकहरा की रिंकी, पिपरही की ममता, मीरा का पुरा की रिंकी, लाटघाट की ईसरावती, मऊ की अंशिका हैं। हिना ने बताया कि आज पहले के मुकाबले महिलाएं जागरूक हो रही हैं। बस उन्हें थोड़े से मार्गदर्शन की आवश्यकता है।