विश्व हीमोफीलिया दिवस हर साल 17 अप्रैल को मनाया जाता है। 17 अप्रैल को वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफीलिया के संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल का जन्म हुआ था। यह दिन हीमोफीलिया और अन्य रक्तस्राव विकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह बीमारी रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी से होती है। थ्राम्बोप्लास्टिक में खून को तुरंत थक्का में बदल देने की क्षमता होती है। खून में इसके न होने से खून का बहना बंद नहीं होता है। जिससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
वरिष्ठ फिजिश्यिन डा. एके मिश्रा ने बताया कि यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। आमतौर पर हीमोफीलिया रोग दो प्रकार का होता है, हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी। हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती है। यह एक वंशानुगत रक्तस्राव विकार है जो मुख्य रूप से पुरुषों को प्रभावित करता है, लेकिन महिलाओं को भी हीमोफीलिया हो सकता है। क्योंकि पुरुषों के पास एक्स गुणसूत्र पर स्थित किसी भी जीन की केवल एक प्रति होती है, इसलिए वे उस जीन को होने वाली क्षति की भरपाई एक अतिरिक्त प्रति के साथ नहीं कर सकते, जैसा कि महिलाएं कर सकती हैं। नतीजतन, हेमोफिलिया ए जैसे एक्स-लिंक्ड विकार पुरुषों में ज्यादा आम हैं। हाल-फिलहाल में हीमोफीलिया का कोई इलाज नहीं है।
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किन खाद्य पदार्थों का हीमोफीलिया पीड़ित करें उपयोग
आजमगढ़। डा. एके मिश्रा ने बताया कि हीमोफीलिया वाले को आयरन रिच डाइट लेनी चाहिए। आयरन युक्त खाद्य पदार्थों में लीवर, लीन रेड मीट, पोल्ट्री, पत्तेदार हरी सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकोली, सूखे बीन्स, अनाज और किशमिश शामिल हैं।
0000000000 हीमोफीलिया मरीज कदापि न करें यह काम
आजमगढ़। उन्होंने बताया कि फुटबॉल, हॉकी या कुश्ती हीमोफीलिया के मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कुछ दर्द निवारक दवाओं से बचें। यह दवाएं रक्तस्राव को बदतर बना सकती हैं उनमें एस्पिरिन और इबुप्रोफेन शामिल हैं। इसके बजाय, एसिटामिनोफेन का उपयोग करें, जो हल्के दर्द से राहत के लिए एक सेफ ऑप्शन है।