जिले में बृहस्पतिवार को भी हुई झमाझम बारिश ने उमस और गर्मी से राहत दी।। इससे सूख रही धान की फसल को जीवन मिल गया तो वही किसान खुश हो उठे। उधर, बरसात से निचले इलाकों में जलभराव और कीचड़ फिसलन से लोग परेशान हुए।
इस बार मानसूनी बारिश समय से नहीं होने से किसान काफी परेशान थे। क्योंकि खरीफ की मुख्य फसल धान को हमेशा पानी की ही आवश्यकता होती है। पूरा जुलाई और आधा से ज्यादा अगस्त माह निकल चुका चुका है। लेकिन मंगलवार तक बारिश नहीं हुई। बुधवार और बृहस्पतिवार के बीच कई बार झमाझम बारिश हुई। इससे किसानों के चेहरे खिल गए।
बुधवार की रात करीब नौ बजे से लेकर बाहर बजे बीच अच्छी बारिश हुई। इससे धान के खेतों में पानी भर गया। बृहस्पतिवार को दिन में भी दो बार बारिश हुई।आसमान में बादलों से पूरा सौसम पूरा सुहाना हो गया है। धान की फसल के साथ ही खरीफ की अन्य फसलों केे लिए यह बारिश अमृत मानी जा रही है। क्योंकि बारिश न होने से कई जगहों पर धान की फसल पीली पड़ने लगी थी। जिसके कारण किसान उनमें यूरिया का छिड़काव नहीं कर पाए थे। इस बारिश से धान की फसल को नया जीवन मिला है। पानी पाने से फसल का रंग जहां बदलने लगा है वहीं, कई दिनों से उमस भरी गर्मी का दंश झेल रहे लोगों को काफी राहत मिली है।
किसान पुल्लुर गिरी ने बताया कि दो दिन से अच्छी बारिश होने से धान की फसल को जीवन मिला है। अब किसान धान में उर्वरक का छिड़काव कर सकेंगे। इस बारिश से किसान काफी खुश हैं। धान के रंग भी बदलने लगे हैं। किसान अंगद सिंह ने कहा कि ऐसी बारिश पहले से हुई होती तो खेतों में धान की फसल और अच्छी दिखती। फिर भी यह बारिश धान की फसल के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। धान के खेतों में पानी भरने से अच्छी नमी आ गई है।
कोट
यह बारिश धान की फसल के लिए बरदान है। किसान अब अपने फसलों की यूरिया से टाप ड्रेसिंग कर सकते हैं। वहीं जिन खेतों में धान की पत्तियां पीली हो गई उनमें यूरिया के साथ जिंक मिलाकर छिड़काव करें। डा. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।