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जीवन जीने की कला सिखाते हैं गुरु : ऋषिकेश

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आजमगढ़। दौलताबाद के श्रीश्री 108 स्वामी आदित्यानंद सरस्वती के आश्रम पर ग्रामीणों की बैठक रविवार को हुई। इसमें 29 जुलाई को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा, दीक्षा व भंडारे के कार्यक्रम पर चर्चा की गई। ऋषिकेश पांडेय ने बताया कि गुरु ही जीवन जीने की कला सीखाता है। गुरु द्वारा बताए गए सदमार्ग, भक्ति, सेवा से ही मनुष्य का जीवन सफल होता है। स्वामी जी ने बताया कि अन्नदान का सबसे बड़ा महत्व होता है। अन्नपूर्णा माता की कृपा से ही मनुष्य का जीवन चलता है। भंडारा एक ऐसा माध्यम होता है। इसमें अमीर, गरीब छोटे-बड़े सभी लोग एक साथ मिलकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि गुरु की सेवा ही सर्वोपरि होती है। क्योंकि गोविंद के यहां पहुंचने का मार्ग गुरु के द्वारा ही प्राप्त होता है। निस्वार्थ भाव से की गई गुरु की सेवा कभी व्यर्थ नहीं होती। स्वतंत्र सिंह ने मनसा वाचा कर्मणा पर विशेष जोर दिया। बैठक में संपूर्णानंद पांडेय, चंद्रशेखर पांडेय, जयप्रकाश पांडेय, शिव नारायण सिंह, भालचंद्र पांडेय, रमेश सिंह, वीरेंद्र सिंह, नागेंद्र सिंह आदि रहे।
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