आजमगढ़। सिखों के अंतिम गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर बृहस्पतिवार को मनाई गई। जनपद के गुरुद्वारों में कार्यक्रम आयोजन किए गए। सबद-कीर्तन के साथ कड़ाह प्रसाद का वितरण किया गया। लंगर में लोगों ने लजीज पकवानों का लुत्फ उठाया। गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर नगर के मातबरगंज स्थित श्री सुंदर गुरुद्वारा परिसर में सुबह से ही सिख समुदाय के लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया था। गुरुद्वारे में गुरुजी के स्थान को आकर्षक ढ़ंग से सजाया गया था। निर्धारित समय पर सबद कीर्तन शुरू हो गया। जिसमें काफी संख्या में सिख समुदाय के साथ ही अन्य धर्मों के लोगों ने भाग लिया। सबद कीर्तन के बाद कड़ाह प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद अटूट लंगर का आयोजन हुआ जो देर शाम तक चलता रहा। फूलपुर प्रतिनिधि के अनुसार सिखों के 10वें और अंतिम गुरु गोविंद सिंह की जयंती कस्बा स्थित संगतजी गली में मनाई गई। जिसकी शुरूआत सुबह शबद-कीर्तन से हुई। कुलदीप सिंह सरदार ने रुक्वाणी की। श्रद्धालुओं ने उस पर रूमाला अर्पित किया। आरती और आनंद साहब का पाठ किया। कुलदीप सिंह ने बताया कि गुरु गोविंद का जन्म पौष (पूस) माह की सप्तमी पर बिहार के पटना में दो जनवरी 1666 में हुआ था। उनके पिता गुरु तेग बहादुर और मां गुजरी कौर थीं। गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की। उनके जन्मदिन को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस मौके पर राजेश कुमार चुट्टर, भृगुनाथ, कुलजीत, अजय गुप्ता, शिवम, अंगद सोनकर, अभय सिंह लालू, सत्यम मोदनवाल, अवनीस सिंह आदि उपस्थित थे।