परिषदीय विद्यालयों को निपुण बनाने के लिए स्कूलों की अब तीन रंगों के आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी। स्कूलों को लाल, पीले व हरे रंग में बांटा जाएगा। साथ ही यह तय किया जाएगा कि स्कूल के कितने छात्र-छात्राएं निपुण हो चुके हैं।
जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1720 प्राथमिक, 528 उच्च प्राथमिक व 454 कंपोजिट विद्यालय शामिल है। उक्त विद्यालयों में करीब सवा चार लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। प्राइमरी कक्षा के विद्यार्थियों को निपुण लक्ष्य के तहत पढ़ाया जा रहा है। दिसंबर 2023 तक इन बच्चों को हिंदी और गणित विषयों में निपुण बनाने की प्रक्रिया चल रही है। अब डायट प्राचार्य की ओर से उनका परीक्षण किया जाएगा। उसके आधार पर थर्ड पार्टी सर्वे करके प्रमाण पत्र जारी होगा। वहीं, दूसरी ओर परिषद ने स्कूलों की निपुण ग्रेडिंग भी शुरू कर दी है। डीएलएड प्रशिक्षुओं को स्कूलों की निपुण लक्ष्य की प्रगति की जांच के लिए निर्देशित किया गया है। इसमें प्रगति के हिसाब से स्कूलों को तीन रंगों में बांटा जाएगा। बच्चों को निपुण मानने के लिए मानक तय किए गए हैं। कक्षा एक के विद्यार्थी हिंदी में पांच शब्दों में बनें वाक्य पढ़ सकते हों। गणित में एक अंक के जोड़ व घटाना आता हो। कक्षा दो में हिंदी में 45 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह में पढ़ना आता हो। कक्षा तीन में हिंदी में 60 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ना आता हो, गणित में तीन अंकीय जोड़ घटाना और दो अंक का गुणा आना चाहिए।
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1. लाल- संघर्षशील 50 प्रतिशत से कम निपुण 2. पीला- मध्यम 50 से 80 प्रतिशत निपुण 3. हरा सक्षम 80 प्रतिशत तक निपुण
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निपुण भारत अभियान के तहत बच्चों को निपुण बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। नए शैक्षिक सत्र में अधिक से अधिक स्कूलों को निपुण बनाया जाएगा। इसके बाद उनकी तीन रंगों में ग्रेडिंग होगी।
- मनोज मिश्रा, प्रभारी बीएसए।