चीनी मिल सठियांव के आसवानी इकाई के संचालन और उत्पादन को लेकर सोमवार को इकाई के कार्यालय में बैठक हुई। आसवनी इकाई के संचालन व विद्युत, डीजल, बगास एवं उत्पादन पर डेबिट और कटौती को लेकर चर्चा हुई।
मिल के जीएम अनिल चतुर्वेदी ने प्लांट की टरबाइन की मरम्मत के खर्च पर सवाल उठाया। इस पर आसवनी प्रबंधक रवींद्र सिंह ने बताया कि मई 2022 में टरबाइन 600 किलोवाट का लोड नहीं उठा पा रही थी। मरम्मत की आवश्यकता थी। इसलिए अगस्त 2022 में टरबाइन को मरम्मत लिए भेज दिया गया। वहीं मेसर्स सिसौदिया रिसर्च कंपनी के पीएन सिसौदिया ने कहा कि टरबाइन की मरम्मत का खर्च आठ लाख रुपये आया, जिसका भुगतान संचालन करने वाली फर्म हमारी कंपनी ने किया था। जीएम अनिल चतुर्वेदी ने टरबाइन मरम्मत के भुगतान का बिल प्रस्तुत करने को कहा। इस प्रकार आसवनी प्लांट के संचालन और उत्पादन के देयों को लेकर आपत्ति को लेकर बैठक में यह तय किया गया कि उत्तर प्रदेश चीनी मिल संघ लखनऊ के मार्गदर्शन के अनुसार विद्युत, डीजल, बगास और अन्य उत्पादन पर डेबिट और पेनाल्टी की रूप रेखा तैयार की गई। भविष्य में आसवनी इकाई का संचालन करने पर मेसर्स सिसौदिया रिसर्च कंपनी और चीनी मिल सठियांव जीएम के बीच अनुबंध किया गया। इस मौके पर मुख्य गन्ना अधिकारी त्रिलोकी सिंह, आसवनी इकाई प्रभारी रामसजन राम, मुख्य लेखाकार सुरेंद्र कुमार, चीफ केमिस्ट बीके यादव, चीफ इंजीनियर राजेश कुमार, विकास कमल, इंद्रसेन सिंह, प्रमोद कुमार शर्मा, सिसोदिया के मालिक पीएन सिंह सहित आदि मौजूद रहे।