सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा ने अब कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इसके कारण लोग पलायन करने को विवश हो गए हैं। सोमवार को नदी बदरहुंआ में 18 तो डिघिया पर 64 सेमी खतरा बिंदु से ऊपर पहुंच गई। क्षेत्र के चार गांवों के रास्तों पर बाढ़ का पानी जमा हो गया है।
करीब आधा दर्जन लोगों का मकान घाघरा नदी में कटने के लिए तैयार है। इसमें वीरेंद्र, राम प्रसाद ,केडी चंद, मेल्हू, राजनाथ, कृपाल, राम प्रसाद, सहादुर, लीलावती आदि का घर है जो कभी भी घाघरा में विलीन हो सकता है। प्राथमिक विद्यालय बगहवा जो घाघरा के कटान से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर पर है। वह भी घाघरा में विलीन हो सकता है।
तहसीलदार ने की लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील
लाटघाट। तेज हो रही काटन की सूचना पर सोमवार की सुबह तहसीलदार सगड़ी विवेकानंद दुबे देवारा खास राजा झगरहवा पहुंचे। ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि आप सभी लोग सुरक्षित स्थान पर चले जाएं, आपके लिए रैन बसेरा विद्यालय को बनाया गया है। उन्होंने बताया कि 36 कटान प्रभावित लोगों के खाते में पांच रुपये भेज दिया गया है। जिसमें अशर्फी, अवधेश, भगवंती, हरेंद्र, इंद्रेश, जयराम, कमलेश, कन्हैया, कोमल, कृपाल, लछिराम, लालचंद, महेश, मीणा, मुरली, पलटन, राहुल, राजेश, राजकुमार, रमाकांत, वीरेंद्र, रमाशंकर, रंजीत, रणविजय, संजय आदि शामिल हैं।
दोनों तरफ नदी की धार, बीच में रह रहे लोग
लाटघाट। देवरा खास राजा गांव के त्रिलोकी का पुरवा बस्ती जब कट गई, तो लोग वहीं कुछ दूरी पर जाकर बस गए। वह जहां बसे वह ऊंचा स्थान है। जिसके दोनों तरफ घाघरा नदी की जल धारा बह रही है। इसके बीच में ही मुंशी, सजगू, भीमली, सेवक, बहादुर, पथरु, फूल बदन, भोला, लालचंद, सूरजभान अपनी झोपड़ी डालकर पशुओं के साथ रह रहे हैं।
घाघरा नदी का जलस्तर,
लाटघाट। बदरहुंआ नाले पर रविवार की शाम घाघरा नदी का जलस्तर 71.42 मीटर दर्ज किया गया था जो सोमवार को 44 सेमी बढ़कर 71.86 मीटर हो गया। वहीं डिघिया नाले पर रविवार को नदी का जलस्तर 70.70 मीटर दर्ज किया गया था जो सोमवार को 34 सेमी बढ़कर 71.04 मीटर हो गया। बदरहुंआ गेज पर नदी का न्यूनतम जलस्तर 70.26 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.52 मीटर है। वहीं डिघिया गेज पर नदी का न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 शून्य मीटर और अधिकतम जलस्तर 72.52 मीटर है। नदी में विभिन्न बैराजों से दो लाख 94 हजार 227 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जिससे नदी के जलस्तर में अभी कमी आने की कोई उम्मीद नहीं है।