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Azamgarh News: डेंगू के डंक से जिले में हुई पहली मौत, दबाने में जुट रहा महकमा

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जिले में डेंगू जाते-जाते जानलेवा हो गया। डेंगू पीड़ित आशा कार्यकर्ता ने शुक्रवार को जौनपुर जिला मुख्यालय स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग सब कुछ जानते हुए भी प्रकरण को दबाने की कवायद में जुटा रहा और डेंगू से मौत की पुष्टि करने से इंकार करता रहा। बाद में सीएमओ ने आशा कार्यकर्ता की मौत की पुष्टि की लेकिन, कहा कि मृतका एंटीजन टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आई थी। उसका एलाइजा टेस्ट नहीं हुआ था।
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बरदह थाना क्षेत्र के चौकी गांव निवासिनी सुनीता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ठेकमा पर बतौर आशा कार्यकर्ता तैनात थी। चार-पांच दिन पूर्व उसकी तबीयत ज्यादा खराब हुई तो परिजन उसे ज्यूली बाजार स्थित प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराए। बाद में जौनपुर जिला मुख्यालय स्थित प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हुई। एंटीजन किट से हुई जांच में वह डेंगू पाॅजीटिव आई। उसने शुक्रवार को जौनपुर प्राइवेट अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।

चार दिन बाद फिर मिला एक डेंगू केस
आजमगढ़। जिले में डेंगू पर अब लगाम लगता नजर आने लगा है। चार दिन के बाद शनिवार को एक नया डेंगू केस सामने आया है। जिले में अब तक मिले डेंगू केसों की संख्या बढ़ कर 135 हो गई है। सीएमओ डॉ. आईएन तिवारी की माने तो ठंड बढ़ने के साथ ही डेंगू का असर भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
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मृत आशा कार्यकर्ता सुनीता काफी दिनों से लीवर की बीमारी से ग्रसित चल रही थी। चार-पांच दिन पूर्व उसे जौनपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एंटीजन किट से हुई जांच में वह डेंगू पॉजीटिव आयी थी। आशा कार्यकर्ता की मौत तो हुई है लेकिन डेंगू से मौत की पुष्टि एलाइजा जांच न होने के चलते नहीं की जा सकती है। - डॉ. आईएन तिवारी, सीएमओ, आजमगढ़।
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