जिले के सरकारी भवनों और अस्पतालों में आग से निपटने केे इंतजाम नाकाफी हैं। कलेक्ट्रेट और विकास भवन समेत कई विभागों के दफ्तरों में अग्निशमन यंत्र बेकार पड़े हैं। ऐसे में अग्निकांड हुआ तो जानमाल का बड़ा नुकसान होने का खतरा है।
जिम्मेदारों को अग्निकांड की सुधि बड़ी घटना के बाद ही होती है। हादसे से पहले आग बुझाने के लिए किए जाने वाले उपायों पर कोई गंभीर नहीं होता। आग से बचाव को सभी सरकारी भवनों में अग्निशमन यंत्र लगाए जाते हैं। अधिकांश दफ्तरों में लगे भी, लेकिन उपयोगिता शो-पीस तक सिमटी है।
विकास भवन में लगे अग्निशमन यंत्र कार्यशील नहीं हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी विवेक शर्मा ने बताया कि इसकी जानकारी मुझे नहीं है। मेंटेनेंस करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग की है। एक अभियान चलाकर सरकारी भवनों को चेक किया जाएगा। यदि ऐसा है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों में कसौटी पर नहीं अग्निशमन यंत्र
जिले में लगभग 120 सरकारी अस्पताल हैं। इनमें से कुछ को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर भवनों में अग्निशमन यंत्र खराब पड़े हैं। टूल्स गायब हो गए हैं। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल व ब्लाकों में स्थित पीएचसी और सीएचसी में अग्निशमन यंत्र जंक खा रहे हैं। कुछ ऐसे अस्पताल हैं जहां मानक के अनुरूप अग्निशमन यंत्र ही नहीं लगे थे।