फूलपुर तहसील के पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के किनारे अंडिका बाग में शनिवार को किसान मजदूर पंचायत में दर्जनों गांवों के ग्रामीण पहुंचे। पंचायत में पहुंचे सूबे के दिग्गज किसान नेताओं ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के किसानों मजदूरों के साथ पूरा देश खड़ा है। इस दौरान किसानों ने हुंकार भरते हुए कहा कि हम किसान एक इंच जमीन नहीं देंगे, जमीन लूटने की इस साजिश को हम कामयाब नहीं होने देंगे।
जन आंदोलन के राष्ट्रीय समंवय की राष्ट्रीय समन्वयक अरुंधती धुरू ने कहा कि जमीन का सवाल जीवन का सवाल है। आजमगढ़ में चल रहे अंडिका बाग और खिरिया बाग आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी जमीन की लड़ाई जीतने का ऐलान है। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी डाक्टर संदीप पांडेय ने कहा कि विकास वह नहीं होता जो विनाश करे। औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर जिन जमीनों को सरकार छीन रही है क्या ये जमीनें जितना रोजगार दे रही हैं उतना कोई कारखाना देगा। ये फैक्ट्रियां सिर्फ गावों को उजाड़ेंगी ही नहीं आस पास के गावों की खेती किसानी के सामने दिक्कत खड़ी होगी। जब जल का दोहन होगा तो जल स्तर नीचे जाएगा। पेट्रोल और डीजल का सीमित भंडार है। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे समेत देश के तमाम एक्स्प्रेस वे बिना काम के हो जाएंगे, जब पेट्रोलियम पदार्थ खत्म हो जाएगा। आजमगढ़ में एयरपोर्ट तो कहीं औद्योगिक पार्क या क्षेत्र के नाम पर किसानों की जमीन लेने वाली सरकार बताए कि कृषि भूमि का क्या विकल्प है। जमीन नहीं रहेगी तो अनाज क्या फैक्ट्रियों में बनेगा। इलाहाबाद से आए अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के अध्यक्ष राम कैलाश कुशवाहा ने कहा कि जमीनें छीनकर किसानों मजदूरों को बर्बाद करने की नीतियों को सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है। जमीनों को लूटकर कारपोरेट को मालामाल किया जा रहा है। महिला अधिकार कार्यकर्ता ऋतु ने कहा कि सरकार की जन विरोधी नीतियों के चलते आज इस तपतपाती धूप में बूढ़ी दादी नानी को इस अंडिका बाग में बैठना पड़ रहा। आपके संघर्ष के आगे सरकार को झुकना होगा। पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव विरेंद्र यादव ने कहा कि पंचायत का निर्णय है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक क्षेत्र या पार्क के नाम पर किए गए सर्वे को रद्द किया जाए। किसान नेता राजीव यादव ने कहा कि यह खेती-किसानी-जवानी बचाने की लड़ाई है। पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे तक के गांव खतरे में हैं। जमीन लूटने की यह साजिश कोरोना महामारी से कम नहीं, इसने किसानों मजदूरों की रातों की नींद, दिन का सुकून छीन लिया है। सरकार यह मुगालता छोड़ दे कि जिस तरीके से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए जमीनें ले ली उसी तरह से औद्योगिक पार्क और क्षेत्र के नाम पर जमीन ले लेगी। जिन खेतों खलिहानों में उसके बाप दादा ने जिंदगी गुजारी उस एक्सप्रेस वे पर जाने पर उसको रुपया देना पड़ता है, यह कौन सा विकास है। इस मौके पर किस्मती, नीलम, मीना, सामाजिक न्याय मंच के राजेंद्र यादव, सुंदर मौर्या, पूर्वांचल किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष प्रेम चंद्र, रविंद्र यादव, निशांत राज, जयप्रकाश, सुनील पंडित आदि उपस्थित थे।