आजमगढ़। किसानों का गन्ना की खेती से मोह भंग हो रहा है। इसकी वजह समय से गन्ना भुगतान नहीं होना है। इस कारण वह अपनी पूंजी नहीं निकाल पा रहे हैं। घाटे का सौदा बनने के कारण किसान अन्य फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। क्षेत्र में गन्ने का रकबा बीते साल की अपेक्षा दो हजार हेक्टेयर कम हो गया है, जबकि यह पिछले साल के सापेक्ष चार हजार हेक्टेयर कम है। यानि साल दर साल रकबा घट रहा है। जो गन्ना विभाग के लिए चिंता का विषय है। जनपद में सठियांव में चीनी मिल है। वहीं जिले में दो गन्ना सहकारी समितियां हैं। गन्ना समितियां किसानों को बीज, खाद व ऋण आदि उपलब्ध कराती हैं। वहीं, गन्ने की खरीदारी व भुगतान का जिम्मा भी इन्हीं पर होता है। ये गन्ना समितियां किसानों को भुगतान नहीं करवा पा रही हैं। जिले के किसानों का चीनी मिल पर करोड़ों रुपये बकाया है। इसका असर गन्ने के रकबे पर पड़ रहा है। वर्तमान में हो रहेगन्ना सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इसमें पता चला है कि पिछले वर्ष जनपद में 11,834 हेक्टेयर भूमि में गन्ना था, जो इस बार सर्वे में अभी तक लगभग 7,322 हेक्टेयर भूमि में गन्ने का उत्पादन किया जा रहा है।सर्वे पूर्ण होने के बाद भी पिछले वर्ष के सापेक्ष लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। करीब नौ हजार हेक्टेयर गन्ना का सर्वे हो सकेगा। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि जिले में कुल 16,189 किसान पंजीकृत हैं। जिसमें कुल 14,763 किसानों ने गन्ना आपूर्ति की थी। इस बार करीब चार हजार हेक्टेयर गन्ने की खेती कम हुई है।