बीते वर्ष लेखपाल व राजस्व निरीक्षकों की तैयार की गई अंश निर्धारण खतौनियों में खासी त्रुटियां हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। अपनी हिस्सेदारी ठीक कराने को वह तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इसे लेकर जब वह अधिकारियों से कहते हैं तो वह उन्हें धारा 30 का मुकदमा करने की सलाह देते हैं।
अंश निर्धारण में गड़बड़ी के चलते केसीसी बनवाने में भी किसानों को परेशानी हो रही है। शासन के निर्देश पर राजस्व विभाग की ओर से किसानाें की खतौनियों में सर्वे कर अंश निर्धारित किए हैं। इसमें काफी गलती की गईं हैं। किसी किसान का अंश कम होने पर उसे ज्यादा कर दिया वहीं अधिक वाले का हिस्सा कम दर्शा दिया है। इससे किसान परेशान हैं। गलती को ठीक कराने के लिए उनके द्वारा तहसीलों का चक्कर काटा जा रहा है। इतना ही नहीं अगर किसी व्यक्ति की दो संतानेें हैं और उसके निधन के बाद जिस जमीन का आधा-आधा अंश निर्धारण न करके एक भाई के हिस्से में ज्यादा तो एक भाई के हिस्से में कम अंश का निर्धारण लेखपालों द्वारा कर दिया गया है। इसको लेकर जब किसान अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं तो अधिकारी द्वारा उससे धारा 30 का मुकदमा दाखिल करने को कहा जा रहा है। इस मुकदमे में एक तो उसका समय काफी जाएगा दूसरे कितने दिन में इसका फैसला होगा। इसे कोई नहीं जानता है। इस बात को लेकर किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
अंश निर्धारण में जो भी गड़बड़ी हुई है उसे दुरुस्त करने की व्यवस्था है। धारा 38 या 116 के मुकदमे से इसे दुरुस्त नहीं किया जा सकता है। मैं इसकी जानकारी करता हूं। सभी एसडीएम से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर इस संबंध में निर्देश दिए जाएंगे।
विनय कुमार गुप्ता, सीआरओ।