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एक लाख से ज्यादा की दवा हुई एक्सपायर, सीएमएस भी फंसी

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आजमगढ़। सीएमएस से शिथिल पर्यवेक्षण और कर्मचारियों की कारगुजारी से गरीब लोगों के लिए आई एक लाख से ज्यादा की दवाएं पड़े-पड़े एक्सपायर हो गईं। प्रकरण में शिथिल पर्यवेक्षण की दोषी पाई गईं सीएमएस डॉ. अमिता अग्रवाल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जद में हैं। नुकसान हुई धनराशि की वसूली दोषियों से करने के लिए इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन की ओर से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेज दी गई है। एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी एनपी सिंह के निरीक्षण में जिला महिला अस्पताल के एक कमरे में दवाएं मिली थी। इसके बारे में अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो सभी ने कमरे के अंदर क्या है इसे बताने से इंकार कर दिया था। जानकारी करने पर पता चला था कि अंदर दवाएं भरी हैं। डीएम ने कमरे को सील करा इस पर जांच बिठा दी थी। जांच टीम ने एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह के साथ ही सीएमएस डॉ. अमिता अग्रवाल और एसीएमओ डॉ. संजय को शामिल किया था। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट पिछल दिनों डीएम को सौंपी थी। इसमें शिक्षिल पर्यवेक्षण के लिए सीएमएस को दोषी पाया गया था। एक लाख से ज्यादा की दवाएं एक्सपायर होने पर तत्कालीन फार्मासिस्ट हरेंद्र को मुख्य रूप से दोषी माना गया। शुक्रवार देर शाम उन्हें स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने निलंबित कर दिया था। शुक्रवार शाम को ही डीएम की ओर से रिपोर्ट प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को भेज दी गई। रिपोर्ट में सीएमएस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबित फार्मासिस्ट से वसूली की संस्तुति की गई है। एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिला महिला अस्पताल के एक बंद कमरे में मिलीं एक्सपायरी दवाओं की जांच में फार्मासिस्ट हरेंद्र यादव के अलावा पर्यवेक्षणीय कार्य में शिथिलता बरतने में सीएमएस दोषी पाई गई हैं। एक्सपायरी दवाओं की कीमत दोषियों से वसूल किया जाएगा। संबंधित दोनों लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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