ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए शिक्षकों को समझाने के लिए संचालित अभियान भी जिले में फ्लाॅप साबित हुआ। बीएसए, बीईओ व जिला समन्वयक ने स्कूल पहुंच कर शिक्षकों को समझाया लेकिन कोई असर नहीं दिखा। शुक्रवार को मात्र 40 शिक्षकों ने ऑनलाइन हाजिरी लगाई है। वहीं बच्चों की भी उपस्थिति ऑनलाइन नहीं भरी जा रही है। मात्र तीन प्रतिशत बच्चों की ऑनलाइन हाजिरी लगाई गई है। ऐसे में उच्चाधिकारियों की हर रणनीति पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
जिले में कुल 2706 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इसमें 1724 प्राथमिक, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय हैं। इनमें करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। प्राथमिक विद्यालय में 7533 व जूनियर में 2866 सहायक अध्यापक व 2946 शिक्षा मित्र तैनात हैं। उक्त विद्यालयों में 268,894 बच्चे पंजीकृत हैं। उक्त विद्यालयों में मात्र तीन प्रतिशत बच्चों की ही ऑनलाइन हाजिरी लगी थी। यह आंकड़ा एक जुलाई का है, जो आज भी इसी पर बना हुआ है। डिजिटल अटेंडेंस को लेकर चल रहे इस विरोध के बीच बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी अब से फील्ड में जाएंगे। इसके लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी एडी बेसिक, बीएसए, जिला समन्वयक आदि विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अगले एक सप्ताह सुबह 7.30 से 10.30 बजे तक विद्यालयों का नियमित भ्रमण करें। डिजिटल पंजिकाओं में शिक्षकों का सहयोग करें। शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों से वार्ता कर उनको डिजिटल पंजिकाओं के लाभ के बारे में बताएं। यह भी बताएं कि बच्चों में कक्षावार, विषयवार अपेक्षित दक्षताएं प्राप्त करना व ग्रेड में सुधार ही लक्ष्य है। बैठक में उन्हें डिजिटल पंजिकाओं के प्रस्तुतिकरण दें, प्रशिक्षण वीडियो साझा करें। बीएसए-बीईओ नियमित प्रगति की समीक्षा कर डिजिटलीकरण में प्रगति लाएं।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा का निर्देश मिला है। हम स्वयं स्कूलों में जाकर निरीक्षण कर रहे और दिए गए निर्देशों का पालन कराने के लिए शिक्षकों को प्रेरित कर रहे हैं। इसके साथ ही सभी बीईओ को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह भी विद्यालयों में जाएं और शिक्षकों से वार्ता करें।
- राजीव पाठक, बीएसए आजमगढ़।