आजमगढ़। उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली पहुंचाने में जर्ज़र तार और पोल बाधक बन रहे हैं। रिवैंप्ड योजना के तहत जर्जर एलटी तारों की स्थान पर एबीसी केबल और खराब पोलों का बदला जाना था लेकिन ग्रामीण क्षेत्र तो छाड़िए अभी तक शहरों में भी एलटी लाइन के जर्जर तार नहीं बदले जा सके। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन वह फाल्ट की समस्या से जूझ रहे हैं।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए जो तार लगाए गए हैं वह काफी पहले के हैं, जिसके कारण
अधिकतम जगहों पर तार पतले होकर जर्जर हो गए हैं। कुछ जगहों पर पोल भी खराब हो चुके हैं। जर्जर तारों में बांस की फल्टी बांधकर विभाग किसी प्रकार से काम चला हरा है। लेकिन इससे आए दिन फाल्ट की समस्या उत्पंन हो रही है, जो निर्बाध बिजली आपूर्ति में बाधा बन रहे हैं। इन जर्जर तारों और पोलों को बदलने के लिए शासन की तरफ से रिवैंप्ड योजना के तहत 138 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसमें जर्जर एलटी की जगह एबीसी केबल लगाने और जर्जर पोलों को बदला जाना है। लेकिन विभाग और कार्यदायी संस्था की उदासीनता के कारण ग्रामीण क्षेत्र तो छोड़िए अभी तक शहरी क्षेत्र में भी जर्जर तार को बदला नहीं जा सका है।इसी के भरोसे उपभोक्ताओं को बिजली की सप्लाई की जा रही है।
00000
हर पोल पर फैला तारों का जंजाल
शहर में लगभग हर पोलों पर केबल का मकड़जाल देखने का मिल रहा है। अगर इन जगहों पर रिवैंप्ड योजना के तहत विभाग एबीसी केबल लगा दिया होता तो शायद पोलों पर ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलती। शहर के मातबरगंज, मुकेरीगंज, आसिफगंज, बड़ादेव आदि मुहल्लों में जर्जर तारों के सहारे बिजली की सप्लाई की जा रही है। जर्जर तार आपस में न सटे इसके लिए विभाग ने तारों के बीच बांस की फल्टी बांधकर काम चला रहा है।