तापमान नीचे आने के बाद भी जिले की विद्युत आपूर्ति पटरी पर नहीं आ सकी है। इसके कारण रबी की खेती प्रभावित हो रही है। दिन में लगभग चार से घंटा ही बिजली मिल पा रही।
इस समय रबी की बोआई का पीक समय चल रहा है। जिले में 2.34 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोआई का लक्ष्य है। जो किसान अगेती सरसों की बोआई किए हैं उनको उसकी सिंचाई करनी है। साथ ही गेहूं की बोआई के लिए भी खेतों मेें पलेवा लगाना है। एक माह से नहरों में पानी नहीं आ रहा है ऐसे में किसान ट्यूबवेलों पर ही निर्भर हैं। लेकिन अब बिजली भी धोखा देनी लगी है। जिसके कारण किसान परेशान है। रात के समय तो लोगों को ठीक ठाक बिजली मिल जा रही है, लेकिन दिन में लगभग चार घंटा बाद ही बिजली मिल पा रही है।
सबसे खराब स्थिति मुबारकपुर के मोहब्बतपुर उपकेंद्र की है। इसके अंतर्गत आने वाले गांवों में दिन में चार घंटा ही बिजली मिल रही है। अल सुबह पांच बजे ही बिजली कट जा रही है। इसके बाद दोपहर में कब आएगी, कब जाएगी इसका काेई टाइम नहीं है। दिन में बिजली न मिलने से किसान जहां सरसों, पशुओं के चारे की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं वहीं, गेहूं की बोआई के लिए खेतों में पलेवा नहीं कर पा रहे हैं। यही हाल मेंहनगर और बूढ़नपुर क्षेत्र की भी है। दिन में बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं है। जबकि शासन का निर्देश है कि गांवों में 18 घंटा बिजली मिलनी चाहिए। दिन में अत्यधिक कटौती होने से किसानी प्रभावित हो गई है।
शेड्यूल के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली दिया जा रहा है। कहीं कोई फाल्ट आने पर ही शड्डाउन लिया जाता है जिसके कारण आपूर्ति बंद करनी पड़ती है। कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाए जाने का कार्य नहीं हो पाया है। - राधेश्याम अधीक्षण अभियंता द्वितीय।