बलरामपुर। आयुष्मान भारत योजना को धरातल पर उतारने के लिए जिले के 28 निजी और 25 सरकारी अस्पतालों को जोड़ा गया था। योजना के विस्तार रूप लेने के साथ ही जिले में आठ निजी अस्पतालों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। अब सरकारी और निजी मिलाकर कुल 45 अस्पताल ही ऐसे हैं जहां आयुष्मान कार्डधारियों का इलाज हो सकेगा। जिले में 10 लाख 37 हजार 623 आयुष्मान कार्डधारक हैं। इनमें से पांच लाख 13 हजार 942 गोल्डेन कार्डधारी है। जिले को आठ दिनों में गोल्डेन कार्ड बनाने के मामले में शासन स्तर से तीसरी रैंक मिली है। जनपद में योजना की शुरूआत 23 सितंबर 2018 में हुई थी। अब तक कुल 24 हजार 678 लोगों ने किसी न किसी बीमारी का इलाज कराया है। ऐसे में अब तक 12 करोड़ 2541 रुपये का भुगतान अस्पतालों को किया गया है। एक समय था जब इस योजना से 28 निजी और 25 सरकारी अस्पताल जुड़े थे। लेकिन किसी न किसी वजह से कई निजी अस्पतालों ने मरीजों के इलाज में आनाकानी शुरू कर दी। जिसके कारण आठ अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया। जिसके चलते अब जिले में मौजूदा समय में 20 निजी और 25 सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारी गंभीर बीमारियों का इलाज करा सकेंगे। इस योजना से जुड़े बिनायक हास्पीटल और मेडिसिटी अस्पताल को 2019 में इस योजना से बाहर कर दिया गया था। वहीं अब 2021-21 में छह और अस्पतालों को इस सूची से बाहर किया गया है। जिसमें मातृ छाया अस्पताल लालगंज, आरओ नर्सिंग होम देवगांव, वासदेई मेमोरियल हास्पीटल सिविल लाइन, शांति हास्पीटल सिविल लाइन, रहमान हास्पीटल हर्रा की चुंगी शामिल हैं। इनके अलावा एक और अस्पताल बाहर किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के डिस्ट्रक्टि कोआर्डिनेटर अजय सिंह ने बताया कि वर्तमान में जिले में कुल 45 हास्पीटल इस योजना से जुड़े हैं। जिसमें 20 निजी चिकित्सालय और 25 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। जो निजी अस्पताल मरीजों के इलाज में आनाकानी कर रहे हैं उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है। अब तक आठ निजी अस्पताल बाहर किए गए हैं।