निजामाबाद। नगर पंचायत निजामाबाद स्थित गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब सिख समुदाय की आस्था का बड़ा केंद्र है। दूर-दूर से सिख समुदाय के लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। यहां गुरु तेग बहादुर सिंह जी महाराज द्वारा निर्मित दुखभंजन कुआं लोगों की पीड़ा का हरता है। इस कुएं के जल से स्नान करने से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। गुरुद्वारे के ग्रंथी जगदीश सिंह ने बताया कि निजामाबाद कस्बे में ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब स्थित है। हमारे गुरु महाराज ने एक कायस्थ परिवार के बालक को तमसा नदी के किनारे जीवित किया था। तब से वह स्थान काफी महत्वपूर्ण माने जाने लगा। गुरु नानक देव जी महाराज सबसे पहले निजामाबाद आए तो उन्होंने इस नदी किनारे अपना डेरा डाला। इसके बाद लोग लोग सुबह-शाम गुरु महाराज के पास प्रवचन सुनने के लिए एकत्रित होते थे। इस पवित्र स्थान पर उन्होंने 21 दिन तक तप किया और संगतों को प्रभु भक्ति से जोड़ा। कुछ समय के बाद बाबा श्री चंद् जी आए और लोगों पर बड़ी कृपा व उपकार किया। कुछ समय बीत जाने के बाद गुरु तेग बहादुर साहिब जी पटना से पंजाब जाते समय इस स्थान पर आए और अपना कुछ समय इस स्थान पर बिताया। गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज ने दुख भंजन कुआं बनवाया। इसमें स्नान करने से रोगियों के रोग दूर होते हैं। 28 नवंबर को गुरु द्वारा चरण पादुका साहिब में गुरुतेग बहादुर साहिब जी महाराज का प्रकाशोत्सव बनाया जाएगा।
निशानी के तौर पर मौजूद हैं गुरुओं की खड़ाऊं
निजामाबाद। गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज यहां से विदा होने लगे तो संतों ने विनती की कि आप अपनी तरफ से हमें कुछ निशानी देकर जाएं तब गुरु जी ने अपने चरण पादुका खड़ाऊं निशानी के रूप में दी। तब से यह खड़ाऊं आज भी इस स्थान पर सुशोभित है। वहीं गुरु नानक देव जी की भी खड़ाऊं भी यहां रखी है।
प्रत्येक वर्ष होता है जोड़ मेले का आयोजन
निजामाबाद। प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में ऐतिहासिक गुरुद्वारा चरण पादुका साहिब निजामाबाद में सालाना जोड़ मेले का भी आयोजन किया जाता है। यहां पूरे भारतवर्ष से लोग सिख संगतों के साथ-साथ आसपास के गांव से भी दर्शन के लिए लोग पहुंचते हैं और तीन दिवसीय इस मेले में प्रतिभाग करते हैं।