आजमगढ़। जिले में कई राइस मिल संचालक ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष का बकाया सीएमआर (कस्टम मिल राइस) जमा नहीं किया है। इसके कारण इन मिलों को इस बार कुटाई के लिए धान नहीं दिया जाएगा। धान की कुटाई के लिए 16 नई राइस मिलों का चयन किया गया है। क्रय केंद्रों पर धान खरीद के बाद यहां पर कुटाई के लिए भेजा जाएगा।
जिले में धान खरीद की शुरूआत एक नवंबर से ही हो गई है। खाद्य विभाग इस बार क्रय किए गए धान की कुटाई नई राइस मिलों पर कराएगा। वर्ष 2021-22 में लक्ष्य से अधिक धान की खरीदारी हुई थी। क्रय किए गए धान को कुटाई के लिए चयनित राइस मिलों को दिया गया था। सिस्टम के अनुसार इन राइस मिलों को धान के बदले चावल देना था। विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाय तो जनपद की 61 राइस मिलें ऐसी हैं जिन पर सीएमआर का करोड़ों रुपये बकाया चल रहा है। 61 राइस मिल के संचालकों ने बकाया 12.44 करोड़ जमा नहीं किया है। यह वसूली विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। नोटिस जारी होने के बाद भी राइस मिल संचालक बकाया सीएमआर जमा नहीं कर रहे हैं। अब विभाग मिल संचालकों पर मुकदमा दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई करेगा। बकाया सीएमआर न जमा करने की वजह से इस बार खाद्य विभाग खरीदे गए धान की कुटाई इन मिलों पर नहीं कराएगा। क्रय केंद्रों से खरीदे गए धान की कुटाई के लिए विभाग द्वारा जनपद में 16 राइस मिलों का चयन किया गया है। क्रय के बाद धान इन्हीं राइस मिलों पर कुटाई के लिए भेजा जाएगा।
12 किसानों से खरीदा गया 345 क्विंटल धान
आजमगढ़। जिले में धान की खरीद वैसे तो एक नवंबर से ही शुरू हो गई थी, लेकिन खेतों में धान होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो पाई थी। मंगलवार को आठ क्रय केंद्रों पर धान की खरीद की गई। धान खरीद के लिए इस बार जनपद में खाद्य विभाग के 20, पीसीएफ के 44 व भारतीय खाद्य निगम के 02 क्रय केंद्र डीएम के अनुमोदन पर खोले गए हैं। ऑन लाइन पंजीकरण कराने के बाद किसान इन केेंद्रों से टोकन लेकर धान बेचेंगे। कटाई, मड़ाई न होने के कारण किसान क्रय केंद्रों पर धान लेकर नहीं पहुंच रहे थे। मंगलवार को कुछ क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू हो् गई। वहां पर 12 किसानों से 345.60 क्विंटल धान की खरीद की गई।
अधिकारी बोले- जिन राइस मिल संचालकों पर सीएमआर बकाया है। उनसे वसूली के लिए नोटिस भेज दी गई है। कुछ लोग आकर जमा भी कर रहे हैं। बकायेदार राइस मिल पर धान की कुटाई नहीं होगी। - नरेंद्र कुमार मिश्र, जिला खाद्य विपणन अधिकरी।