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अलौकिक है दक्षिणमुखी देवी मां का दरबार

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शहर के चौक स्थित दक्षिणमुखी मां का किया गया भव्य श्रृंगार। - फोटो : AZAMGARH
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शहर के चौक स्थित दक्षिणमखी देवी मां के मंदिर के प्रति लोगों की अपार आस्था है। कहते हैं कि मां के दरबार में मत्था टेकने और सच्चे मन से पूजा करने पर सभी मुरादें पूरी होती है। इस मंदिर में मां का प्रतिदिन शृंगार होता है। हर रोज हजारों भक्त दर्शन पूजन करते है। नवरात्र में यह दर्शन करने वालों की भीड़ लग रही है। बताया जाता है कि पांच शताब्दी पूर्व इस स्थान पर एक बहुत बड़ा टीला था, जहां पर निजामाबाद क्षेत्र के शाहपुर गांव निवासी भैरो जी तिवारी ने तप किया था। उन्होंने इस स्थान को जब समतल कराने का प्रयास किया तो यहां पर भूमि से काला पत्थर दिखा। पत्थर की खोदाई की गई तो काले रंग की देवी मां की प्रतिमा मिली। प्रतिमा मिलने के बाद से पूजन-अर्चन एक बार शुरू हुआ तो आज तक जारी है। स्वयं प्रकट हुई इस प्रतिमा की विशेषता है कि यह दक्षिणमुखी हैं। भैरो जी तिवारी आजीवन दक्षिणमुखी देवी मां का पूजन अर्चन करते रहे। सवा सौ वर्ष बाद जब जनपद में विकास की लौ जली तो दयाल जी तिवारी के परिजनों ने उक्त स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। आज इन्हीं के परिजनों द्वारा मंदिर का पजा-पाठ किया जा रहा है। दक्षिणमुखी देवी मां के चेहरे का भाव प्रहर दर प्रहर परिवर्तित होता रहता है लेकिन इसका आभास उन्हीं लोगों को होता है जो माता के अनन्य भक्त हैं। मां के प्रति विशेष श्रद्धा रखने वाले भक्त व पुजारी बताते है कि सुबह सात बजे से 9 बजे तक मां की प्रतिमा पर मुस्कुराहट देखी जा सकती है, उसके बाद 10 बजे तक मां का चेहरा सामान्य रहता है, साढ़े 12 बजे के बाद चेहरे पर थकान का भाव नजर आता है, उसके बाद तीन बजे तक क्रोध सा नजर आता है। वहीं पांच बजे तक प्रतिमा पर इस कदर तेज रहता है कि आंखें नहीं टिकती वहीं शाम साढ़े छह बजे के बाद चेहरे पर मुस्कान रहता है, रात्रि में आठ बजे के बाद से थकान भरा रूप नजर आने लगता है। वहीं रात्रि आरती के समय मां के चेहरे का स्वरूप बिल्कुल अलग ही बयां होता है।
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