आजमगढ़। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड इस बार आनन-फानन में हर कार्य एक साथ करने की कोशिश में जुटा रहा। यह आगे निकलने की होड़ है या वाकई कम समय में ज्यादा काम करके दिखाने की कोशिश की गई। बोर्ड परीक्षा हो चुकी हैं। उसके मूल्यांकन कार्य होने के चंद दिनों बाद प्रयोगात्मक परीक्षाएं भी करा ली गई। समस्या इस बात की हुई कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ही नहीं पता कि प्रयोगात्मक परीक्षा में कितने बच्चों ने परीक्षा दी और कितने बच्चों ने छोड़ दी। माध्यमिक शिक्षा परिषद की दो चरणों में प्रयोगात्मक परीक्षा हो चुकी है। दोनों चरणों में जिन परीक्षार्थियों की परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकी है। ऐसे छूटे हुए परीक्षार्थियों की विद्यालयवार एवं विषयवार संख्या अपलोड कराए जाने के लिए वेबसाइट यूपीएमएसपी डॉट ईडीयू डॉट इन पर पांच मई से क्रियाशील कर दी गई थी। शिक्षा विभाग के मुताबिक उस समय कुल करीब 13 हजार 383 बच्चे प्रायोगिक परीक्षा नहीं दे सकें थे। कारण कि कुछ अनुपस्थित थे तो कुछ केंद्रों पर 111 परीक्षक अनुपस्थित थे। जिसे लेकर बच्चों को एक बार फिर अंतिम मौका दिया गया। ताकि बच्चों को परीक्षा दिलाई जा सके। प्रयोगात्मक परीक्षाएं 20 मई तक ही संपन्न करा लिए गए। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. पीके उपाध्याय ने बताया कि कितने बच्चों ने प्रयोगात्मक परीक्षा दिया है कितनों ने नहीं दिया है। इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है। बोर्ड का ऐसा कोई आदेश भी नहीं है कि हम विद्यालयों से उपस्थित व अनुपस्थित बच्चों की सूचना मांगे। इसलिए हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है।