घाघरा नदी का जलस्तर घटने बढ़ने से कटान तेज हो गई है। कटान से अब तक दर्जनों किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन घाघरा में विलीन हो चुकी है। तो वही दर्जनों किसानों की खेती योग्य भूमि कटान की जद में आ रही है। घाघरा के कटान से किसान धीरे-धीरे भूमिहीन होते जा रहे हैं। मुआवजे के नाम पर आंशिक रूप से थोड़ा बहुत मिल जाता है। उनके जीविका का एकमात्र साधन खेती है। खेती योग्य भूमि घाघरा में कटती जा रही है और शासन-प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है। अभी तक सहबदिया गांव में हो रही कटान का मुआयना करने स्थानीय लेखपाल तक नहीं पहुंचे हैं उच्चाधिकारियों की बात ही दूर है। इस समय सहबदिया गांव के प्रह्लाद, विनोद पटेल, जोखन पटेल, राजू, संजय, राणा प्रताप, राम सूरत, राम सकल, विनोद, लल्लू सिंह, नंदलाल, विरेंद्र, हरेंद्र, विश्वनाथ आदि दर्जनों किसान हैं। जिनकी जमीन घाघरा में कटती जा रही है। सहबदिया गांव के ही विनोद सिंह पटेल, दया सिंह पटेल, जोखन पटेल, पारस पटेल, लल्लू आदि की पचासों बीघा जमीन घाघरा में विलीन हो रही है। एसडीएम सगड़ी अतुल गुप्ता ने बताया कि घाघरा से हो रही कटान की जांच कराई जाएगी और यथासंभव उसकी मदद होगी। बाढ़ से निपटने के लिए जो भी जरूरी काम होगा सब किया जाएगा।