सरायमीर थाना क्षेत्र के इसरौली गांव के पास छह साल पहले गोली मारकर हत्या मामले में आरोपी पूर्व मंत्री हीरालाल गौतम ने बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट में समर्पण कर दिया। अदालत ने उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इससे पहले आरोपी पूर्व मंत्री ने हाईकोर्ट से स्थानीय न्यायालय में तलब न किए जाने की गुहार लगाई थी लेकिन उनको राहत नहीं मिली। न्यायालय ने इनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस ने कुर्की आदेश के लिए न्यायालय की अनुमति लेने की तैयारी शुरू कर दी थी।
मुकदमे के अनुसार, सरायमीर थाना क्षेत्र के इसरौली हरिजन बस्ती के पास 27 नवंबर 2010 को कमालपुर गांव निवासी फौजदार पासवान पुत्र जुग्गू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के भाई लालता प्रसाद ने खानपुर गांव निवासी बसपा के पूर्व मंत्री हीरालाल गौतम पुत्र रामचरन और कमालपुर गांव निवासी शिवकुमार पुत्र रामाश्रय तथा एक अज्ञात के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने विवेचना के दौरान हीरालाल गौतम का नाम निकाल दिया था और इस मामले में शिवकुमार और रोशन लाल के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। पुलिस की विवेचना से असंतुष्ट मृतक के भाई लालता ने अदालत से हीरालाल को तलब करने की याचना की। अदालत ने दोनों पक्षों की पेश दलीलों को सुनने के बाद हीरालाल को अदालत में कोर्ट के जारी समन के बाद भी हाजिर नहीं हुए। इस पर अदालत ने गैर जमानती वारंट पारित कर दिया। इस बीच हीरालाल ने हाईकोर्ट में शरण ली। हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर निचली अदालत में समर्पण करने का आदेश पारित किया।
कोई अन्य रास्ता न देख पूर्व मंत्री हीरालाल गौतम ने 15 जून को अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में समर्पण किया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।