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राकेश सिंह की आईडी से हड़पे गए 2 करोड़ 33 लाख

Sun, 21 Jun 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आजमगढ़
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विद्युत विभाग की एक मुश्त समाधान योजना के तहत 1596 उपभोक्ताओं के 2 करोड़ 33 लाख रुपये के घोटाले को राकेश सिंह की फर्जी आईडी से अंजाम दिया गया। इस मामले में सिधारी पुलिस ने शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली। यह फर्जी आईडी पूर्व अधिशासी अभियंता रहे एसडी सिंह के कार्यकाल में बनवाई गई थी।
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विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता ओपी राम ने सिधारी पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि उन्होंने 27 जून 2014 को पदभार ग्रहण संभाला। उनके चार्ज लेने के बाद सरकार ने बकाया विद्युत बिलों को जमा कराने के लिए एकमुश्त समाधान योजना की शुरू की थी। उपभोक्ताओं को अधिकारियों से बिल सत्यापित कराने के बाद विद्युत वितरण खंड प्रथम कार्यालय में खोले गए काउंटर में बकाया राशि जमा करानी थी।

योजना के तहत 1596 उपभोक्ताओं की 2 करोड़ 33 करोड़ रुपये की बकाया राशि आनलाइन जमा की गई। लेकिन यह सारी रकम सरकार के खाते में न जाकर कुछ जालसाज किस्म के लोगों ने हड़प ली।  करीब तीन माह पूर्व एसटीएफ द्वारा कुछ संदिग्ध लोगों को गिरफ्तारी और पूछताछ के दौरान कई बातों का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि राकेश सिंह नाम से बनाए गए यूजर आईडी के जरिए उपभोक्ताओं के बिल जमा कराए गए हैं। लेकिन राकेश सिंह कौन हैं। इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी है। एसओ सिधारी रामनरेश यादव ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
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ऐसे बनाई जाती है आईडी ः विद्युत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता ओपी राम ने बताया कि राकेश सिंह के नाम से यूजर आईडी उनके पूर्व अधिशासी अभियंता रहे एसडी सिंह के समय बनी थी। बताया कि यूजर आईडी बनाने के लिए एमडी कार्यालय से अप्रूवल लिया जाता है। वहां से स्वीकृति के बाद एचसीएल कंपनी को भेजा जाता है। कंपनी से स्वीकृति मिलने के बाद ही आईडी का प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे में इस बात का पता लगाना आवश्यक है कि फर्जी आईडी की स्वीकृति किसने दी।

उपभोक्ताओं पर पड़ी दोहरी मार ः जिले के 1596 बिजली उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ी है। विभाग के कुछ जयचंदों से सेटिंग कर लेनदेन के जरिये जिन लोगों ने बिल माफ कराया था अब उन्हें फिर से बिल जमा कराना होगा। पिछले माह एसटीएफ ने आजमगढ़ में छापा मारा था तो विभाग के कई लोगों को घेरे में लिया गया था। जांच पड़ताल में पता चला था कि विभाग के ही कुछ लोगों ने बिचौलियों के माध्यम से भारी भरकम बिल का बैलेंस जीरो करा दिया था। अब फिर बिल आने से उपभोक्ता परेशान हैं।
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