आजमगढ़। वर्ष 2007 से 2013 तक जिले में समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, पेंशन, कन्या विद्याधन में किए गए लगभग 150 करोड़ के घोटाले का मुद्दा अमर उजाला की ओर से लगातार उठाने पर पर प्रशासन की नींद खुल गई है।
मामले में मंगलवार को समाज कल्याण अधिकारी की ओर से मुख्य शाखा प्रबंध डीसीबी, प्रधानाचार्य, प्रबंधक और चार खातेदारों को लगभग दो करोड़ 85 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है। गबन का रुपया वापस नहीं करने पर विधिसंगत कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
बता दें कि वर्ष 2007 से 2013 तक समाज कल्याण और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं की मदों में विभागीय अधिकारियों, स्कूलों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से 150 करोड़ का घोटाला हुआ था। वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया था।
सीडीओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। मामले की जांच शुरू हुई तो पाया गया कि करीब 50 से अधिक कालेजों ने अपने-अपने विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी/काल्पनिक दिखाकर दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हजम कर ली।
उदाहरण के तौर पर वर्ष 2012-13 में जनता इंटर कालेज पतिला गौसपुर में महज 72 छात्रों के पंजीकरण हुए थे। इसके सापेक्ष विद्यालय में 1177 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति फर्जी खातों के माध्यम से ले लिया। इसी प्रकार के खेल अन्य विद्यालय में भी हुए थे।
यही नहीं घोटालेबाजों का सिंडिकेट इतना तगड़ा था कि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के जो चेक वापस हुए थे, उन्हें दूसरे खातों में भुना दिया गया था और धन निकाल गबन कर लिया गया था। धन का भुगतान जिले के यूनियन बैंक आफ इंडिया और जिला सहकारी बैंक के 37 से अधिक शाखाओं से किया गया था।
तथ्य सबूत मिलने पर 2.80 करोड़ रुपये के घोटाले में जिले के कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया था।
लेकिन पुलिस की कार्रवाई भी महज रिपोर्ट दर्ज करने तक ही सिमटकर रह गई। 22 मार्च 2016 को तत्कालीन डीएम सुहास एलवाई ने कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा था, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अमर उजाला की ओर से फिर से मुद्दा उठाने पर मंडलायुक्त के रविंद नायक ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों के पेंच कसे। यही नहीं छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का 90 लाख रुपया जो वापस आया था वो भी डीसीबी की मुख्य शाखा दबाकर बैठ गई। इसे विभागों को वापस ही नहीं किया गया।
एक आरोपी के खिलाफ 31 लाख की वसूली के लिए आरसी भी कटी, लेकिन निजामाबाद तहसील आज तक इसे वसूल नहीं पाई। तमाम मुद्दों के अखबार की लगातार सुर्खियां बनने के बाद प्रशासन और विभाग की ओर से घोटाले में फिर से कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मंगलवार को जिलाधिकारी की संतुति पर समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह की ओर से डीसीबी के मुख्य शाखा प्रबंधक समेत सात लोगों को 2.85 करोड़ की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया है। रुपया वापस नहीं करने पर विधि संगत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इन्हें जारी हुई नोटिस
प्रबंधक डीसीबी मुख्य शाखा- 90.34 लाख
जय प्रकाश यादव प्रधानाचार्य बलिराम बेचू इंटर कालेज, कौतूकपुर-61.86 लाख
हनीफ, प्रबंधक जावेद पब्लिक जूहा स्कूल, अंबारी-24.15 लाख
गोविंद पुत्र सुरेश, देवखरी, भंवरनाथ- 38 लाख
अनीता पत्नी गोविंद. देवखरी, भंवरनाथ-45.35 लाख
राहुल पुत्र रामरूप, देवखरी, भंवरनाथ-10.28 लाख
रमेश पुत्र रामधनी, बस्ती, गौरी नरायाणपुर-15.42 लाख
घोटाले की जांच के दौरान पाया गया कि जिला सहकारी बैंक कप्तानगंज के खाता धारक गोविंद पुत्र सुरे निवासी देवखरी, भंवरनाथ के खाता संख्या 24432 से 38 लाख, अनीता पत्नी गोविंद निवासी देवखरी, भंवरनाथ के खाता संख्या 24509 से 45.35 लाख, राहुल पुत्र रामरूप निवासी देवखरी, भंवरनाथ के खाता संख्या 30014 से 10.28 लाख और रमेश पुत्र रामधनी निवासी बस्ती, गौरी नरायाणपुर के खाता संख्या 29942 से 15.42 लाख रुपये का आहरण किया गया था।
ये धन सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का था। ये आम उपभोक्ता के खाते में कैसे पहुंचा ये भी जांच का विषय है। सूत्रों की मानें को इस मामले में शाखा प्रबंधक पर भी कार्रवाई की गाज गिर सकती है।