पकड़े गए आरोपी ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं।
बहुत कम समय में आतंक का पर्याय बन चुके 50 हजार के ईनामी बदमाश धर्मेंद्र सिंह के करीबियों की पुलिस कुंडली तैयार कर रही है। बीते वर्ष हुई दो हत्याएं और लूट के मामले में तीन थानों की पुलिस को महीनों से उसकी तलाश है। लेकिन मऊ जिले के चिरैयाकोट बाजार में दिन दहाड़े एजेंसी मालिक की हत्या के मामले में उसका नाम आने से सक्रियता बढ़ गई है।
एसपी ने बदमाश का डाटा जुटाने के लिए तीन थानों की पुलिस के साथ-साथ क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम को भी लगाया है। काम पूरा हो जाने के बाद पुलिस अभियान के तहत कार्रवाई करेगी।
तरवां थाने के खुटहन गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह का नाम तीन फरवरी 2015 को मेंहनगर थाने के टोडरपुर गांव के पास अपने गांव के दवा विक्रेता लालजी प्रजापति की गोली मारकर की गई हत्या के बाद सुर्खियों में आया। जानकारों की मानें तो धर्मेंद्र पूर्व में मऊ जिले में छोटे बड़े कई घटनाओं को अंजाम दे चुका था। लेकिन लालजी की हत्या के बाद वह न केवल चर्चित हो गया। बल्कि 12 हजार का इनामिया बन गया।
फरारी के दौरान ही धर्मेंद्र अपने साथियों संग 27 मार्च 2015 को देवगांव बाजार में दिन दहाड़े सराफ प्रेमचंद की गोली मारकर हत्या कर दिया। इस घटना में धर्मेंद्र का नाम आने के बाद लोग खौफ खाने लगे। पुलिस जहां इनाम राशि बढ़ाकर 50 हजार कर उसकी तलाश में जुट गई। वहीं धर्मेंद्र अपनी गिरोह मजबूत करने में लग गया। इसी सिलसिले में धर्मेंद्र बीते वर्ष अक्तूबर माह में गंभीरपुर थाने में लूट की घटना को अंजाम देकर भाग रहा था।
हालांकि पीछा कर रहे एसटीएफ वाराणसी से उसका सामना हो गया। बिंद्राबाजार से करीब दो किलोमीटर पूरब हुई इस मुठभेड़ में धर्मेंद्र तो भाग गया। लेकिन उसका एक साथी दबोच लिया गया। सूत्रों की मानें तो बीते दिसंबर माह में मऊ जिले के चिरैयाकोट बाजार में बैंक का 30 लाख रुपया लूटने के बाद यह गिरोह और मजबूत हो गई। वर्तमान समय में धर्मेंद्र के गिरोह में दो प्रतिबंधित कारबाइन और एक एके 47 जैसे असलहे मौजूद हैं। जिसका प्रयोग वह चिरैयाकोट में एजेंसी मालिक की हत्या में किया है। मऊ पुलिस ने बैंक लूट का पर्दाफास कर दिया। लेकिन सूत्र इस खुलासे को गलत बता रहे हैं।