जिला कारागार से गुरुवार की शाम तीन बंदियों की फरारी के मामले की जांच कर रहे डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज यादुवेंद्र शुक्ला ने जांच में अव्यवस्था के लिए जेल अधीक्षक डा. रामधनी को जिम्मेदार पाया है क्योंकि यदि जेल अधीक्षक खामियों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था दुुरुस्त करा दी गई होती तो शायद बंदियों को भागने का मौका नहीं मिलता। गुरुवार की रात एक बजे से ही मंडल कारागार पर जमे डीआईजी जेल ने शनिवार को अपनी जांच रिपोर्ट आईजी जेल गोपाललाल मीणा को भेजकर उचित कार्रवाई की संस्तुति की है। आईजी स्तर से कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
दूसरी तरफ, जेल में लगे 32 सीसीटीवी कैमरों के खराब होने का मामला भी तभी उजागर हुआ जब दीवार फांदकर तीन बंदी फरार हो गए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आईजी जेल ने शुक्रवार को ही शासन को अवगत कराया। उनके कहने के बाद जेल की निर्माण इकाई राजकीय निर्माण निगम के सचिव से वार्ता की गई।
सचिव के निर्देश पर शनिवार की सुबह से ही राजकीय निर्माण निगम आजमगढ़ के इंजीनियर जेल पहुंचे और सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया पूरी करने में जुट गए। माना जा रहा कि रविवार तक जेल के सभी सीसीटीवी कैमरे काम करना शुरू कर देंगे। कारागार प्रशासन के पास पर्याप्त स्टाफ न होने की वजह से गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वाच टावर पर भी सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। इस घटना के बाद जेल प्रशासन का पूरा ध्यान बंदी रक्षकों की ड्यूटी मेन्यूवल के हिसाब से लगाने पर है। इसमें लापरवाही न बरतने की सख्त चेतावनी भी दी गई है।
फरार बंदियों से मिलने वालों का खंगाला जा रहा रिकार्ड : जिला कारागार की दीवार फांदकर गुरुवार की शाम भागे तीन बंदियों की टोह लेने के लिए जेल में उनसे मिलने वालों का पुलिस रिकार्ड खंगाल रही है। माना जा रहा कि इनकी गिरफ्तारी में मिलने वालों की भूमिका अहम हो सकती है। उधर, एसपी ने शनिवार को इन तीनों बंदियों की क्राइम हिस्ट्री डीजीपी को भेजकर इनके ऊपर पुरस्कार घोषित कराने की अनुमति मांगी है। साथ ही उन्होंने प्रदेश की पुलिस को अलर्ट करने की जरूरत बताई है। दूसरी तरफ गिरफ्तारी में जुटी पुलिस की टीमें बंदियों के रिश्तेदारों के जरिए उनका सुराग लगाने के प्रयास कर रही हैं। अभी तक पुलिस के हाथ खाली हैं।
दो जून 2014 से जिला कारागार में गाजीपुर जिले के मरदह थाना क्षेत्र के महारे गांव निवासी प्रकाश मुसहर, गहमर थाना क्षेत्र के मनिया गांव निवासी चंद्रशेखर उर्फ शेखर मुसहर और नंदगंज थाना क्षेत्र के अगस्ता गांव निवासी जितेंद्र मुसहर निरुद्ध थे। तरवा थाना क्षेत्र में 2014 में हुई हत्या और लूट के मामले में निरुद्ध तीनों बंदियों ने 17 अगस्त की शाम योजनाबद्ध तरीके से गैस पाइप और चद्दर के सहारे जेल की 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गए।
इन तीनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच टीमें गठित की गई हैं। तीनों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और जेल प्रशासन शनिवार को पूरे दिन इन तीनों से मिलने वालों का रिकार्ड खंगाल रहा था। पुलिस सूत्रों की मानें तो एक जुलाई से 17 अगस्त तक इनसे जो भी मिलने आया। उन्हें बंदियों के भागने की योजना की जानकारी हो सकती है। यह भी हो सकता है कि मिलने वालों में किसी ने उन्हें भागने का सुझाव दिया होगा। यह भी हो सकता है कि किसी खास मिशन के लिए इन्हें जेल से बाहर निकाला गया हो।
उधर, एसपी ने इन तीनों का अपराध विवरण पुलिस मुख्यालय भेजा है। ताकि प्रदेश पुलिस को अलर्ट घोषित कराया जा सके। डीजीपी की मुहर लगने के बाद इन पर इनाम घोषित किया जाएगा। बंदियों के गिरफ्तारी में जुटी टीमें शुक्रवार से ही आसपास के जिलों में फैले गिरोह के सदस्य और नात, रिश्तेदारों के जरिए सुराग लगा रही हैं। एसपी ने टीम में उन्हीं लोगों को टीम में शामिल किया है, जो इनकी गिरफ्तारी में शामिल रहे या गतिविधियों से भलीभांति परिचित हैं। एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि प्रदेश पुलिस को जानकारी देने और इनाम घोषित कराने के लिए डीजीपी को रिपोर्ट भेज दी गई। अनुमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि तीनों बंदियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगी हैं।