अतरौलिया थाने के बढय़ा गांव निवासी चर्चित प्रिया सिंह हत्याकांड हो, या फिर फूलपुर कोतवाली के जगदीशपुर गांव निवासी पांच वर्षीय बालक जिगर गोंड़ और मुबारकपुर कस्बे के पूराखिजिर मुहल्ले में हत्या कर तीन वर्षीय बालक जुलकरनैन की मौत का मामला हो। सभी के रहस्य पर अब भी पर्दा पड़ा हुआ है। न्याय की आस में जहां घर वालों की कमर टूट गई। पुलिस की नजरें विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ से आने वाली रिपोर्ट पर अटकी हुई है।
अतरौलिया थाना क्षेत्र की प्रिया सिंह (8) पुत्री संतोष सिंह 20 दिसंबर 2015 की शाम कहीं गायब हो गई। 31 दिसंबर को उसकी लाश घर के पीछे खेत में मिट्टी खोदकर गाड़ी हुई मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रिया के मौत धारदार हथियार से गला रेतकर की गई थी। उसके प्राइवेट पार्ट में भी चोटें थी।
पुलिस ने घरवालों सहित करीब एक दर्जन लोगों का डीएनए टेस्ट कराने के लिए सेंपल लिया लेकिन जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिल सकी। वहूं, दो मार्च 2016 को फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के जगदीशपुर गांव निवासी दया प्रसाद गोंड़ के पांच वर्षीय बेटे नेहाल की हत्या कर उसकी लाश बोरे में भरकर फेंकी मिली। यही हाल तीन मार्च 2016 को मुबारकपुर कस्बे के पुराखिजिर मुहल्ले में हत्या कर पोखरे में फेंकी गई तीन वर्षीय बालक जुलकरनैन पुत्र अबूजर की मौत का भी है। उसका भी बिसरा जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है लेकिन रिपोर्ट आने का इंतजार है।
बिसरा या डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आने में देरी होने के चलते मामला लंबित है। शासन ने मंडल मुख्यालय पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जमीन तलाशी जा रही है। प्रयोगशाला स्थापित होने पर पुलिस की तमाम समस्याएं आसानी से हल हो जाएंगी। पीड़ितों को न्याय दिलाने में आसानी होगी।
दयानंद मिश्रा, पुलिस अधीक्षक