आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के देउरपुर गांव में स्थित विनोद यादव के ईंट भट्ठे पर बंधक बनाकर रखे गए आठ मजदूर गुरुवार को किसी तरह से चंगुल से छूटकर भाग निकले। जैसे ही ये सभी रोडवेज पर पहुंचे कि भट्ठा मालिक के गुर्गों ने उन्हें घेर लिया और दोबारा भट्ठा पर चलने की धमकी देने लगे। घटना की सूचना मिलने पर शहर कोतवाली पुलिस पहुंच गई, जिसे देखकर गुर्गें भाग निकले। मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने श्रम विभाग को मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है। सभी मजदूर श्रम विभाग की अभिरक्षा में हैं। पीड़ितों में संदीप भार्गव, रुकमणि भार्गव आदि ने बताया कि यह सभी छत्तीसगढ़ प्रदेश के रहने वाले हैं। बीते नवंबर माह में इन्हें कप्तानगंज थाने के देउरपुर गांव निवासी विनोद यादव अपने भट्ठे पर काम करने के लिए लाया था। वहां से कुल आठ लोग आए थे। इसमें चार बच्चे भी शामिल हैं। मजदूरों का आरोप है कि भट्ठे पर आने के बाद से ही यह सभी दिन रात मजदूरी कर रहे थे। एक माह तक काम करने के बाद जब इन लोगों ने मजदूरी मांगी तो भट्ठा मालिक ने देने से इंकार कर दिया। साथ ही इन्हें मारपीटकर जबरन काम कराने लगा। गुरुवार को यह सभी मजदूर भट्ठा मालिक के चंगुल से छूटे और रोडवेज की बस से आजमगढ़ शहर पहुंच गए। उधर इन मजदूरों के जाने की जानकारी होने पर भट्ठा मालिक ने अपने गुर्गों को भेजा जो रोडवेज पर इन मजदूरों को घेरकर पुन: भट्ठे पर चलने की धमकी देने लगे। इस दौरान मौके पर भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर शहर कोतवाली पुलिस पहुंच गई। पुलिस मजदूरों को हिरासत में लेकर घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दी। डीएम के निर्देश पर श्रम विभाग के लोग पहुंचे और इन मजदूरों को अपनी सुरक्षा में लेकर साथ चले गए। डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने बताया कि मामले की जांच श्रम विभाग कर रहा। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भट्ठा मालिक विनोद यादव ने बताया कि मजदूरों का आरोप गलत है। वह सिर्फ इन्हें रोक रहा था। मजदूरी रोकने या बंधक बनाने का आरोप झूठा है।