आजमगढ़। शहर के ठंडी सड़क पर स्थित विवेकानंद नगर मुहल्ले में 23 फरवरी को मोबिल के गोदाम में लगी आग के भयावह मंजर को हर किसी ने देखा और उसके संवेदनशीलता को महसूस किया। हालांकि यह घनी आबादी के बीच खुलने वाला पहला गोदाम नहीं रहा। बल्कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी धड़ल्ले से इस तरह के गोदाम बनाए गए हैं। यहीं से व्यापारियों का पूरा माल सप्लाई होता है। यदि समय रहते ऐसे गोदामों को आबादी के बीच से हटाया नहीं गया तो भविष्य में कोई और बड़ी घटना हो सकती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एडीएम प्रशासन लवकुश कुमार त्रिपाठी ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जांच सौंपी है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर इसकी रिपोर्ट मांगी है।
जांच के दौरान इन बातों पर भी प्रमुखता से ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। जिसमें किन-किन क्षेत्रों में और कब से यहां गोदाम चल रहा है। गोदाम के मालिक कौन हैं और घनी आबादी के बीच गोदाम बनाने के लिए इन्होंने सक्षम अधिकारियों से अनुमति ली है। यदि अनुमति ली है तो घनी आबादी के बीच किस अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट लगाई है और किस अधिकारी ने संस्तुति दी है। बता दें कि शहर के वीआईपी मुहल्ला ठडी सडक़ पर ज्यादातर दीवानी न्यायालय के वकीलों का मकान है। इस मुहल्ले में शहर के बड़े उद्यमी और सरकारी कर्मचारी भी मकान बनाकर रहते हैं। इस मुहल्ले से सटे दीवानी न्यायालय और जजों का आवास भी है। बावजूद इसके विवेकानंद नगर मुहल्ले में मोबिल का गोदाम बनाया गया था। 23 फरवरी की दोपहर लापरवाही के चलते उक्त गोदाम में आग लग गई। फायर विभाग की छह गाडिय़ों के जरिए विभाग के लोग करीब तीन घंटे की अथक मेहनत के बाद किसी तरह से आग की इस घटना पर काबू पाए। संयोग ही रहा कि इतनी भीषण आग लगने के बाद भी कोई अनहोनी नहीं हुई। इस घटना के बाद एडीएम प्रशासन ने शहर से लेकर गांव देहात में घनी आबादी के बीच मोबिल आयल, ब्रेक आयल, पेट, तेल, घी आदि का घनी आबादी के बीच गोदाम बनाए हैं। इसकी जांच के लिए सोमवार को मुख्य अग्निशमन अधिकारी को पत्र लिखा है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट मांगी है।
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डीएम के निर्देश पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जांच सौंपते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। - लवकुश कुमार त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन