आजमगढ़। आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी (एआईएमआईएम) के पूर्व जिलाध्यक्ष कलीम जामई पर एनएसए लगा दिया गया। एसपी की रिपोर्ट पर डीएम ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। सरायमीर थाना फूंकने और लूटपाट करने के आरोप में उसे कोर्ट ने जमानत दी थी। गुरुवार को उसे जेल से रिहा होना था। उससे पहले ही पुलिस वालों ने जेल प्रशासन को एनएसए का परवाना थमा दिया और वह जेल से बाहर नहीं निकल सका। कलीम जामई के ऊपर एनएसए न लगने पाए इसे लेकर पार्टी के लोग एक सप्ताह से एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए थे।
पुलिस की तरफ से कलीम जामई पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई के लिए भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक सोशल साइट पर धर्म के विरुद्ध अभद्र टिप्पणी करने वाले गिरफ्तार आरोपी पर एनएसए लगाने की मांग करते हुए 28 अप्रैल 2018 को कलीम जामई अपने कार्यकर्ताओं के साथ सरायमीर बाजार में तोड़फोड़ की। बाजार बंद करा दिया था। सरायमीर थाने पर हमलाकर तोड़फोड़ व लूटपाट की। पुलिस बूथ भी फूंक दिया था। इस दौरान चोट लगने से एसडीएम निजामाबाद बागीश कुमार शुक्ला, सीओ फूलपुर रविशंकर प्रसाद समेत कई घायल हुए थे। तत्कालीन एसपी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में पुलिसवालों ने काफी मशक्कत कर हालात को नियंत्रण में किया। तभी से वह जेल में निरुद्ध है। इसके अलावा कलीम जामई को पांच मई 2016 में निजामाबाद थाने के खुदादादपुर में हुए सांप्रदायिक हिंसा के लिए भी जिम्मेदार ठहराया गया है। कलीम के विरुद्ध 22 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक मामले धार्मिक उन्माद फैलाने का है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के शक था कि कहीं कलीम जामई पुन: जेल से बाहर निकला तो धार्मिक उन्माद फैलाकर माहौल खराब करने का काम कर सकता है। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए उसके विरुद्ध एनएसए की कार्रवाई की गई। एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस की रिपोर्ट पर डीएम ने स्वीकृति प्रदान करते हुए कलीम जामई पर एनएसए लगा दिया है। ताकी चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार का कानून व्यवस्था में खलल न पैदा हो सके।