आजमगढ़। जिले में वर्ष 2007 से 2013 के दौरान समाज कल्याण विभाग में हुए 150 करोड़ से अधिक के घोटाले में वर्ष 2014-15 के दौरान जिले के तीन थानों में चार एफआईआर की गई थी। इसमें 34 को नाम और पदनाम से नामजद किया गया था। जांच पुलिस के हाथ में आने के बाद मामले में जमकर हीलाहवाली और खेल किया गया। पहले तो जिला स्तरीय अधिकारियों ने मामले में ध्यान नहीं दिया, जिससे मामला ठंडे बस्ते में रहा। अब जब जिलाधिकारी की ओर से मामले में कार्रवाई की मुहीम छेड़ी गई है तो पता चल रहा है तीन साल की जांच में पदनाम से नामजद अधिकारियों के नाम भी नहीं कुल सके हैं। पुलिस की ये हीलाहवाली अब कार्रवाई में आड़े आ रही है।
समाज कल्याण विभाग में हुए 150 करोड़ से अधिक के घोटाले में 2.86 करोड़ के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद प्रोबेशन, समाज कल्याण, माध्यमिक शिक्षा विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अधिकारियों, बाबुओं आदि 34 लोगों के खिलाफ नाम और पदनाम से नामदज करते हुए एफआईआर कराई गई थी। पिछले तीन साल के दौरान कभी थाना पुलिस तो कभी क्राइम ब्रांच मामले की जांच करती रही। इस बीच विवेचकों के ट्रांसफर भी होते रहे। जिसके हाथ में जांच रही उसने नाम निकालने, बचाने आदि के नाम जमकर खेल किया। नया विवेचक आया तो उसने अपने हिसाब से काम किया। पिछले कुछ माह से इस घोटाले के अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद जिलाधिकारी की ओर से जांच में नकेल कसी गई। पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए गए। आरोपियों की गिरफ्तारी और गैंगेस्टर की कार्रवाई की बातें हुई। अब जब इस प्रकरण को अंजाम तक पहुंचाने के समय आया तो पता चल रहा है कि तीन साल की जांच के दौरान पुलिस के विवेचक अभी कर पदनाम से दर्ज हुए मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों का नाम भी नहीं खोल पाए हैं। मामले को लेकर जिलाधिकारी एसपी से नाराजगी जताई और गुरुवार को एसपी अजय साहनी, एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार और एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह और सीओ सिटी सच्चितानंद को कार्यालय में तलब कर दिया। जल्द से जल्द नाम खोलने और चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए गए। ताकि आरोपियों के ऊपर गैंगेस्टर की कार्रवाई की जा सके।