आजमगढ़। गंभीरपुर थाने से महज एक किमी. की दूरी पर स्थित बिंद्राबाजार के दक्षिण तरफ एक हाते में काफी दिनों से चल रही अवैध शराब की फैक्ट्री पर 25 अक्तूबर की रात एसटीएफ लखनऊ की टीम ने छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार की थी। मौके से भारी मात्रा में तैयार शराब और उपकरण बरामद हुआ था। मिली भगत के आरोप में गंभीरपुर थाने का एक दरोगा और सात सिपाही हुए थे निलंबित। घटना के बाद तत्कालीन एसपी ने आरोपियों की संपति कुर्क करने और धंधे में शामिल अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक ना तो इनकी संपति कुर्क करने जैसी कोई कार्रवाई हुई, ना ही अन्य कोई आरोपी ही गिरफ्तार हो सका। मामला फाइलों में दबा दिया गया। एसटीएफ द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक गंभीरपुर थाने के रानीपुर रजमो गांव निवासी राजीव सिंह का बिंद्राबाजार में हाता है। जहां वह अवैध शराब की फैक्ट्री चला रहा था। राजीव के धंधे को उसका भाई अवनीश सिंह और मैनपुरी जिले के आशाराम यादव आदि चला रहे थे। अपनी फैक्ट्री में तैयार माल की सप्लाई यह लोग स्कार्पियो, स्वीफ्ट कार, बोलेरो, पिकअप आदि से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में करते थे। 25 अक्तूबर 2017 की रात एसटीएफ लखनऊ की टीम छापेमारी कर इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से 40 ड्रमों में भरकर रखा गया शराब बनाने का शीरा, दो लाख से अधिक शराब पैक करने की शीशी, शराब बनाने के उपकरण, रैपर, नौशादर, यूरिया आदि बरामद हुई थी। मिली भगत के आरोप में गंभीरपुर थाने के एक दरोगा और सात सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया। जबकि आबकारी विभाग ने उसे आबकारी निरीक्षक के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसका छह माह पूर्व ही स्थानांतरण हो गया था। पूर्व एसपी ने आरोपियों के घर की महिलाओं सहित अन्य को भी आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार करने और संपति कुर्क करने का निर्देश दिया था, लेकिन एसपी के स्थानांतरण के बाद कार्रवाई के बजाय मामला फाइलों में दबा दिया गया। रविशंकर छवि, एसपी ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आने पर धंधे में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी, संपति कुर्क करने सहित अन्य कार्रवाईयों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसमें जो भी कोई सरकारी कर्मचारी लिप्त हैं उन्हें भी बक्शा नहीं जाएगा।