आजमगढ़। जेल में बंदियों द्वारा धड़ल्ले से मोबाइल चलाने के मामले में एसडीएम सदर द्वारा की गई जांच में 12 बंदी रक्षक दोषी पाए गए हैं। इन लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए शनिवार को जेलर की तरफ से सिधारी थाने में तहरीर दी गई। साथ ही इन्हें निलंबित करने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही इन्हें निलंबित कर दिया जाएगा। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर इतने बंदी रक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही, शेष अन्य के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जांच जारी है। सिधारी थाने में जितेंद्र सरोज, मनीष कुमार सहित 12 बंदी रक्षक ों के खिलाफ तहरीर दी गई है। इन बंदी रक्षकों की मिलीभगत से जेल में निरुद्ध बंदी ना केवल धड़ल्ले से मोबाइल चला रहे थे, बल्कि आपराधिक घटनाओं को भी अंजाम दे रहे थे। इस मामले में अमर उजाला की तरफ से 11 नवंबर और 11 मार्च के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।16 मार्च को एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और एसपी सिटी कमलेश बहादुर ने जेल में सघन तलाशी अभियान के दौरान 35 मोबाइल, 13 चार्जर और छह ईयरफोन बरामद किए। मोबाइल पकड़े जाने से नाराज बंदी रक्षकों ने बंदियों को थर्ड डिग्री दिया। जिससे नाराज बंदियों ने जेल में हंगामा, उपद्रव और तोड़फोड़ की। माहौल को शांत कराने में प्रशासन को पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। डीएम शिवाकांत द्विवेदी की रिपोर्ट पर जेल अधीक्षक अनील कुमार गौतम, जेलर हरीश कुमार और डिप्टी जेलर निलंबित कर दिए गए। जेल के भीतर मोबाइल के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच डीएम ने एसडीएम सदर को सौंपी थी। एसडीएम द्वारा अब तक की गई जांच में 12 बंदी रक्षक दोषी पाए गए हैं। जिनके विरुद्ध केस दर्ज करने के लिए जेलर की तरफ से सिधारी थाने में शनिवार को तहरीर दी गई। हालांकि तहरीर शुक्रवार को ही दी गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी त्रुटियां की वजह से उसे वापस ले लिया गया। शनिवार को खामियां दूर करने के बाद पुन: थाने में तहरीर दे दी गई। पुलिस केस दर्ज करने में जुटी हुई थी। इन बंदी रक्षकों के विरुद्ध जहां सिधारी थाने में केस दर्ज कराई जा रही, वहीं निलंबन की कार्रवाई के लिए जेल अधीक्षक की तरफ से रिपोर्ट भेजकर अनुमति मांगी गई है।
जेल में मोबाइल चलाने के लिए एसडीएम की जांच में दोषी पाए गए 12 बंदी रक्षकों के विरुद्ध केस दर्ज करने के लिए सिधारी थाने में तहरीर दे दी गई। इनके निलंबन की कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। अनुमति मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- भूपेश कुमार सिंह, जेलर, जिला जेल