आजमगढ़। अधिकारियों के चुस्त पुलिसिंग का दावा मेहनाजपुर थाना क्षेत्र में फेल है। यहां पीड़ितों की नहीं बल्कि आरोपियों की सुनी जाती है। शायद यही कारण है कि बेखौफ बदमाशों ने 15 अक्तूबर की रात दावत खाकर लौट रहे वृद्ध की रोवापार गांव के पास जघन्यता पूर्वक हत्या कर दिए। मरते-मरते वृद्ध आरोपियों का चिल्ला-चिल्लाकर नाम ले रहा था, लेकिन पुलिस अभी तक मुख्य आरोपियों को नहीं गिरफ्तार कर सकी। उधर दीपावली के दिन इसी थाना क्षेत्र के नोनीपुर उर्फ नई कोट गांव निवासी सोनू यादव को घर में घुसकर विपक्षियों ने मारपीटकर उसे अधमरा कर दिया। इस मामले में कार्रवाई तो दूर की बात रही। पुलिस पीड़ित को ही घायलावस्था में इधर-उधर टहला रही है। पुलिस की सह पर खुलेआम घूम रहे आरोपी इन्हें सुलह न करने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
केस नंबर एक
घर से बाहर नहीं निकल पा रही मां-बेटी
मेहनाजपुर थाना क्षेत्र के नई बस्ती गांव निवासी जंगबहादुर सिंह की पट्टीदारों से रंजिश चलती थी। 15 अक्तूबर की रात करीब आठ बजे वह रोवांपार गांव से भोजन करके लौट रहा था। जैसे ही इंटर कालेज रोवांपार के पास पहुंचा कि घात लगाए बदमाशों ने पीट-पीटकर जंगबहादुर का हाथ-पैर तोड़ते दिए बदमाश जंगबहादुर को मरा समझकर फरार हो गए। जबकि जंगबहादुर मौके पर तड़पते हुए आरोपियों का नाम ले रहा था। इसका पूरा वीडियो वायरल हुआ था। घटना के संबंध में विपक्ष के नरेंद्र सिंह, शैलेष सिंह, ऋषू, झन्नू सहित पांच लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस शैलेष और ऋषू को गिरफ्तार कर ली। जबकि अन्य आरोपी फरार हैं और धमकी दे रहे। भय के चलते जंगबहादुर के दोनों बेटे फरार हैं। जबकि बेटी चांदनी और पत्नी घर में नजरबंद हैं। हाईस्कूल की छात्रा चांदनी की पढ़ाई छूट गई है। फरार आरोपी आए दिन मुकदमा उठाने की धमकी दे रहे। वह बाहर निकलने पर चांदनी की हत्या करने के लिए उसका पीछा कर रहे हैं। मजेदार बात है कि थाने के दरोगा और सिपाही सबकुछ जानने के बाद भी मौन हैं। चांदनी का आरोप है कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी की बजाय उल्टे हम मां-बेटी को समझा रही है। उधर विपक्षी के समर्थन में तरह-तरह के लोग भी आकर भय फैला रहे हैं।
केस नंबर दो
दूसरे के यहां शरण लेकर रह रहा है सोनू
मेहनाजपुर थाना क्षेत्र के नोनीपुर उर्फ नई कोट गांव निवासी सोनू यादव पुत्र बद्री पट्टीदारों के चंगुल से अपनी जमीन को मुक्त कराने के लिए मुंबई छोड़कर गांव आया हुआ है। उसके पिता और बहन मुंबई में रहते हैं। जबकि सोनू यहां अकेले रहता है। सात नवंबर को दिन में सोनू अपने मकान में सोया हुआ था। तभी विपक्षी दरवाजा तोड़कर उसके मकान में घुस गए और लाठी-डंडा से मारपीटकर उसे घायल कर दिया। चोट लगने से सोनू के सिर में जहां दस टांका लगा है। वहीं हाथ और पैर की हड्डीयों में चोट लगने से दर्द हो रहा। थाने में केस दर्ज कराने पहुंचे सोनू को पहले तो दीवान ने डांटकर भगा दिया, लेकिन बाद में एसपी ग्रामीण के निर्देश पर मामूली धारा में केस दर्ज कर मौन साध गई। मामूली धारा लगाने पर पुन: एसपी ने एसओ को फटकार लगाई। एसपी के निर्देश पर पुलिस कार्रवाई की नाम पर घायल सोनू को इधर-उधर घुमा रही है। आरोपियों और पुलिस की सांठगांठ का ही परिणाम है कि विपक्षी सोनू को मुकदमा दर्ज कराने पर जान से मारने की धमंकी दे रहे। वह इनके भय से दूसरे के यहां शरण लेकर रह रहा है।