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लापरवाही से बढ़ रहा गांजे का काला कारोबार

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आजमगढ़। पुलिस की लापरवाही से ना केवल अवैध शराब कारोबार जोरों पर चल रहा बल्कि गांजे का अवैध कारोबार भी जोर पकड़े हुए है। पूर्व में एक ट्रक गांजे की खेप पकड़े जाने का मामला तरवां थाना क्षेत्र में उजागर हुआ था। हालांकि पुलिस पर आरोप लगा था कि आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बजाय इसने पूरा माल ही 15 लाख रुपये में बेच दिया। दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस के इस कार्यप्रणाली की पोल शुक्रवार को एसटीएफ लखनऊ की टीम ने खोलकर रख दिया। अब मामले में लिपापोती का दौर शुरू हो गया है। बता दें कि नारकोटिक्स विभाग लखनऊ की सूचना पर एसटीएफ लखनऊ की टीम द्वारा जहानागंज थाना क्षेत्र के बड़हलगंज बाजार के पास से डीसीएम के तहखाने में छिपाकर चार क्विंटल गांजा ले जा रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह लोग जहानागंज थाना क्षेत्र के रहने वाले एक बड़े कारोबारी के गोदाम में माल ले जा रहे थे। यहां से आजमगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में गांजे की सप्लाई की जानी थी। सूत्रों के मुताबिक पुलिस की मिली भगत से जहानागंज, तरवां, गंभीरपुर और देवगांव में गांजे की तस्करी जोरों पर हो रही। पुलिस इन तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की बजाय अच्छीखासी रकम लेती है। पुलिस और गांजा तस्करों के बीच कितना गहरा रिश्ता है। इसका अंदाजा वर्ष 2014 में तरवां थाना क्षेत्र से पकड़ा गया एक ट्रक गांजा महज 15 लाख रुपये लेकर छोड़ दिए जाने की घटना से लगाया जा सकता है। इस मामले में तत्कालीन एसपी दिनेश चंद्र दूबे ने गांजा बेचने वाले पुलिसवालों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया। इस मामले को दबा दिए जाने के बाद से ही गांजा तस्कर अलग-अलग ठिकाना बनाकर तस्करी कर रहे हैं।
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तरवां थाना क्षेत्र का रहने वाला विजय यादव गांजे का बड़ा कारोबारी है। पूर्व में भी वह कई बार गिरफ्तार हो चुका है। यह माल विजय के यहां जा रहा था या किसी और के यहां इसकी जांच की जा रही। इस दौरान पूर्व में उजागर हुए मामले को भी संज्ञान में लिया गया है। जो तथ्य सामने आएंगे, उसके तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। - नरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण
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