आजमगढ़। रानी की सराय थाना क्षेत्र में 16 नवंबर की शाम पैदल जा रही शिक्षिका को स्कार्पियो सवार चार लोगों द्वारा चलती गाड़ी में गैंगरेप किए जाने की घटना का 22 नवंबर को एसपीसिटी कमलेश बहादुर ने खुलासा कर दिया। उनका दावा है कि गैंगरेप जैसी कोई घटना ही नहीं हुई है। यह सब बातें पीड़िता और उसके घर वालों की मनगढ़ंत कहानी है। पीड़िता की शादी दोिव्यांग से हो गई है और वह अपने पति के घर नहीं जाना चाहती। इसलिए इस प्रकार की कहानी रची है। पुलिस के मुताबिक पीड़िता के द्वारा बताए हुए सभी बिंदुओं की गहनता से जांच पड़ताल की गई। वह जिस रास्ते से घर जाने और सामने से स्कार्पियो आने की बात कह रही। उस रास्ते पर स्थित कई भवनों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज खंगाला गया। इस दौरान कोई भी स्कार्पियो उधर से नहीं गुजरी है। रास्ते से जब कोई गाड़ी ही नहीं गुजरी है तो अपहरण कर गैंगरेप किस प्रकार से होगा। उधर घर पहुंची पीड़िता ने शुक्रवार को मीडियाकर्मियों को बयान दी कि पुलिस अपने हिसाब से बयान दर्ज कराने के लिए उसके प्रेमी को हिरासत में लेकर रखे हुए थी। मन के मुताबिक बयान न देने पर प्रेमी को जेल भेजने की धमकी दे रही थी। इसके अलावा पुलिस पीड़िता का बयान दर्ज करने से पहले उसे पानी में कोई दवा पिला दी। जिसके चलते उसे कुछ पता नहीं चला और वह वही बात कहती चली गई। जैसा पुलिसवाले चाह रहे थे। शनिवार को शिक्षिका के प्रेमी से बात की गई तो उसने बताया कि पुलिस पूछताछ के लिए हमें जरुर हिरासत में ली थी, लेकिन मेरे साथ कोई बदसलुकी नहीं हुई, ना ही मुझे किसी तरह की धमकी ही दी गई। यह जरुर सच है कि कोचिंग से घर आते समय शिक्षिका ने मुझे फोन की थी, मैं गांव के अन्य बच्चों के साथ बालीबाल खेल रहा था। इसलिए उसे लेने नहीं पहुंचा। शिक्षिका के फोन के बाद मैंने उसे करीब 17 बार फोन किया, लेकिन फोन रिसिव नहीं हुआ। 18 वीं बार फोन उठा, पर कोई आवाज नहीं आई। बाद में मुझे मैसेज आया कि अब मैं तुम्हारे काबिल नहीं रही। इस संबंध में एसपी रविशंकर छवि ने कहा कि पुलिस ने सारे तथ्य और सबूतों के आधार पर घटना का खुलासा की है। भ्रम फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।