आजमगढ़। बरदह थाना क्षेत्र के नर्वे गांव में शुक्रवार की सुबह पौने आठ बजे घर में घुसकर चारपाई पर बैठे अखिलेश कुमार की हत्या के बाद मौके पर जुटी भीड़ और पहुंचे अधिकारियों को इस मामले में किसी गहरी साजिश का अंदेशा है। लोगों को यह बात हजम नहीं हो रही कि आखिर हमलावरों को कैसे पता चल गया कि अखिलेश अकेले और निहत्थे बैठा है। उसका भाई छत पर गया है और प्राइवेट बाडीगार्ड ड्राइवर के साथ ठेकमा बाजार गया हुआ है। इन सभी बातों की गुत्थी सुलझाने और आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस सभी के मोबाइल का रिकार्ड खंगाल रही है। मौके से एक भी खोखा न मिलने से अंदाजा लगाया जा रहा कि हत्या में प्रयुक्त असलहा पिस्टल या रिवाल्वर रहा होगा।
बता दें कि अखिलेश और अरविंद दोनों भाई दिल्ली से अक्सर दो से तीन महीने में एक बार घर आते थे। यहां दो से तीन दिन रहकर पुन: दिल्ली लौट जाते थे। इसीक्रम में चार दिन पूर्व ही दोनों भाई दिल्ली से घर आए हुए थे। गांव वालों ने बताया कि इनके पास खुद का लाइसेंसी असलहा था। जिससे वह बुधवार की रात छत से फायर भी किए थे। अखिलेश का मकान गांव में आबादी से हटकर लिंक मार्ग और नहर के करीब बना है। मकान के चारों तरफ आठ फीट की बाउंड्री है। बाहर निकलने के लिए बड़ा से गेट लगा है। जो अक्सर बंद रहता है। छोटे गेट से ही लोगों का आना-जाना होता है। शुक्रवार की सुबह पौने आठ बजे अखिलेश के बाडीगार्ड और चालक एक साथ ठेकमा बाजार नाश्ता लेने चले गए। जबकि बड़ा भाई अरविंद शौच करने के लिए भवन के दूसरे मंजिल पर चला गया। जबकि अखिलेश आंगन में चारपाई पर बैठा हुआ था। तभी उसकी हत्या की गई। शक इस बात का है कि क्या हमलावरों को यह पता था कि अखिलेश नीचे अकेला बैठा है। यदि यह बात साबित हो जाती है तो यह पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगा कि कातिल कोई बाहरी नहीं, बल्कि करीबी है और अखिलेश किसी साजिश का शिकार हुआ है। क्यों अखिलेश के घर के माहौल के विषय में कोई नजदीकी ही जान सकता है। वह मकान और माहौल से भलीभांति परिचित रहा है। इसके अलावा मौके से एक भी गोली का खोखा नहीं मिला है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा कि हत्या में प्रयुक्त असलहा रिवाल्वर या पिस्टल रहा होगा।
पुलिस हर पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच पड़ताल कर रही है। सभी के मोबाइल का रिकार्ड भी खंगाला जा रहा। बहुत जल्द गुत्थी सुलझने का अनुमान है। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी सिटी