आजमगढ़। जेल में निरुद्ध बदमाशों द्वारा जेल के भीतर धड़ल्ले से मोबाइल चलाने के मामले की सौंपी गई जांच को प्रभारी डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज एके सिंह ने पूरी कर कार्रवाई के लिए एडीजी जेल को भेज दिया। डीआईजी जेल की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट में जेल के भीतर बंदियों द्वारा मोबाइल चलाने के लिए जेल के कई अधिकारी और कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है। डीआईजी जेल की रिपोर्ट पर सही ढंग से कार्रवाई हुई तो जेल के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर जल्द ही गांज गिर सकती है। प्रभारी डीआईजी जेल गोरखपुर एके सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक बगैर अधिकारी और कर्मचारियों की मिली भगत से जेल के भीतर मोबाइल का प्रवेश होना संभव नहीं है। क्योंकि जेल के भीतर प्रत्येक आने-जाने वालों की सघन तलाशी ली जाती है। जगह-जगह निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा आदि भी लगा हुआ है। ऐसे में जेल के अंदर आने और जाने वाले प्रत्येक लोगों की गतिविधियां कैद होती हैं। ऐसे में जेल के भीतर मोबाइल का प्रवेश बगैर जेल के किसी अधिकारी या कर्मचारी के मिली भगत के नहीं हो सकता। बता दें कि जेल में निरुद्ध अपराधी जेल के भीतर से ही ना केवल मोबाइल के जरिए बाहर के लोगों को अपना संदेश या मैसेज देते हैं। बल्कि जेल के भीतर से ही लोगों को फोन कर रंगदारी मांगते हैं। जेल के भीतर से ही कई बदमाशों ने हत्या का खड्यंत्र रचकर कईयों की हत्या भी करवा चुके हैं। अमर उजाला ने अपने 11 नवंबर के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। खबर का संज्ञान लेते हुए दूसरे दिन एडीजी जेल प्रकाश चंद्र ने पूरे मामले की जांच महराजगंज जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक/प्रभारी डीआईजी जेल एके सिंह को सौंपी थी। प्रभारी डीआईजी जेल अपनी जांच पूरी कर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट एडीजी जेल को भेज दी है। प्रभारी डीआईजी जेल एके सिंह के मुताबिक जेल के भीतर बंदियों द्वारा मोबाइल चलाने के मामले में जेल के कई अधिकारी और कर्मचारी दोषी हैं। जांच रिपोर्ट भेजवा दी गई है। जो भी कार्रवाई होगी। वह एडीजी जेल की तरफ से की जाएगी।