आजमगढ़। देवगांव कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में चार अगस्त को खेत से बीज उखाडने गई आशा कार्यकत्री की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस अभी भी उलझी हुई है। जांच पड़ताल के दौरान पुलिस को जानकारी हुई है कि कार्यकत्री के परिवार का नाम राशन कार्ड से कट गया था। वह नाम जोड़वाने के लिए एक प्रधान से कही तो विवाद हुआ और उसने देख लेने की धमकी दी थी। इस बात की जानकारी होने के बाद पुलिस गंवई राजनीत सहित अन्य कई बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। बता दें कि आशा कार्यकत्री देवगांव कोतवाली के जिस गांव की रहने वाली थी। उस गांव में दलित और मुस्लिम समुदाय के लोगों की बाहुल्यता है। इसको लेकर अक्सर लोगों में विवाद और एक दूसरे को फंसाने और नीचा दिखाने की साजिश सहित अन्य घटनाक्रम होते रहते हैं। इसी को लेकर पूर्व में कई लोगों की हत्याएं भी हो चुकी हैं। लालगंज बाजार में स्टेट बैंक के पास से निकले मार्ग पर बसे इस गांव से पहले सुनसान इलाका है। जहां अक्सर लोग घूमकर मौके की तलाश में रहते हैं। कई बार लोग बाहर लड़कों के साथ लड़कियों को रंगेहाथ पकड़कर उनकी धुनाई कर पुलिस को सौंपा भी है। पुलिस की जांच में इस बात को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसी घटना के खुलासे के लिए इंस्पेक्टर देवगांव विजय प्रताप सिंह को ट्रेनिंग के बीच से बुला लिया गया है। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक आशा कार्यकत्री का नाम राशन कार्ड से कट जाने पर उसने गांव के एक प्रधान से नाम जुड़वाने को कहा तो उससे नोंक-झोंक हुई थी। प्रधान ने देख लेने की धमकी दी थी। इसीबीच देर रात को महिला की लाश मिलने से शक की सुई उक्त प्रधान पर गहरा गई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही कि कहीं कोई प्रधान और महिला के बीच हुई नोंकझोंक का फायदा तो नहीं लिया है।
गंवई राजनीति सहित अन्य बिंदुओं को भी अपनी जांच में शामिल किया गया है। संदिग्धों से लगातार पूछताछ की जा रही। जल्द ही घटना के खुलासा होने की उम्मीद है। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपीसिटी
सरकारी कार्य में बाधा का आरोप
आजमगढ़। आशा कार्यकत्री की मौत के तीसरे दिन सात अगस्त की शाम लालगंज बाजार में आजमगढ़-वाराणसी प्रमुख मार्ग को जाम करने वालों के विरुद्ध बुधवार को कोतवाल देवगांव ने तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें गांव के प्रदीप कुमार, विश्वजीत उर्फ डब्लू, संकठा राम, मुकेश कुमार, प्रमोद कुमार, आकाश, आनंदभूषण को नामजद और 35 अज्ञात महिला, पुरुषों को आरोपित किया है। कोतवाल का आरोप है कि यह लोग हाथों में लाठी-डंडा आदि लेकर प्रमुख मार्ग पर जाम लगाते हुए न केवल सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाया। बल्कि इनके कृत्यों से लोगों में भय और दहशत का माहौल उत्पन्न हो गया था।