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बंदियों को उकसाने के दोषी हुए चिह्नित, रिपोर्ट हो रही तैयार (विचित्र सर के ध्यानार्थ)

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जेलआजमगढ़। जेल में 16 मार्च को हुए उपद्रव के लिए बंदियों को उकसाने वाले मुख्य लोगों चिह्नित कर लिया गया है। इसके लिए पूर्व मंत्री अंगद यादव और एआईएमआईएम के पूर्व जिलाध्यक्ष कलीम जमाई को जिम्मेदार माना गया है। पुलिस जेल में हुई घटना के लिए मुख्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसे अदालत में चल रहे इन लोगों के खिलाफ मुकदमों की फाइल में भी लगाया जाएगा।
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लालगंज तहसील के अधिवक्ता एवं कांग्रेसी नेता राजनरायन सिंह की हत्या के मामले में बसपा के पूर्व मंत्री अंगद यादव वर्ष 2016 से जेल में निरुद्ध हैं। कलीम जामई भी अप्रैल 2018 में सरायमीर थाने पर हमलाकर तोडफ़ोड़, लूटपाट, आगजनी करवाने के मामले में निरुद्ध हैं। कलीम के खिलाफ कई थानों में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, लोगों को भड़काने सहित अन्य धाराओं में केस है। वर्तमान समय में कलीम एनएसए के तहत निरुद्ध हैं। 15 मार्च को बैरक नंबर पांच में बिस्तर बिछाने को लेकर अतहर और विनय पांडेय नामक बंदी में मारपीट हुई थी। अतहर के पक्ष में आमिर, अकबर, उमैर, अकरम आदि उतरे और विनय को घायल कर दिया। दूसरे दिन अधिकारी मामले की जांच करने पहुंचे और अंगद, कलीम, सुरेंद्र मिश्रा, विक्रम सिंह सहित अन्य की मोबाइलें जब्त कर ली गई। यह लोग दो से तीन अलग-अलग मोबाइल चला रहे थे। पुलिस का मानना है कि इससे नाराज अंगद और कलीम ने अपने-अपने लोगों को जेल में भड़ाकर हंगामा करा दिया। उपद्रव करने वालों में सचिन पांडेय, दिनेश भाटी, श्यामबाबू पासी, धर्मेंद्र पासी आदि भी रहे।
16 मार्च को जेल में हुई घटना के लिए प्रमुख रूप से अंगद यादव, कलीम जामई आदि जिम्मेदार रहे। इनके खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही। जेल की घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट मुकदमों की फाइलों में भी लगाया जाएगा। ताकि फैसला के समय इस मामले पर भी गौर करते हुए निर्णय लिया जा सके। - नरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण
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जेल की घटना के लिए पुलिस भी जिम्मेदार
आजमगढ़। जेल के भीतर बंदियों द्वारा मोबाइल चलाने के लिए जितने जिम्मेदार जेल के अधिकारी और कर्मचारी हैं, उससे कम भूमिका पुलिसवालों की नहीं है। क्योंकि जेल के भीतर लोगों से मिलने वालों की जेल के बाहर मौजूद पुलिस चौकी के सिपाहियों को भी सघन तलाशी लेने का निर्देश है। जेल चौकी के सिपाही और दरोगा अपनी जिम्मेदारी निभाते तो शायद ही जेल के भीतर मोबाइल का प्रवेश संभव होता। ऐसे में जेल पुलिस चौकी में तैनात पुलिसवालों के भी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इस तरह से मिलते गए मोबाइल
आजमगढ़। एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और एसपीसिटी कमलेश बहादुर के नेतृत्व में 16 मार्च की दोपहर पुलिस टीम ने जेल में छापेमारी कर 35 मोबाइल, 13 चार्जर, सात ईयरफोन आदि बरामद किए। जेल सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने पहले उमैर, अतहर की मोबाइल बरामद की। इन दोनों की मोबाइल छिन जाने के बाद इन सभी ने अन्य लोगों का नाम बताना शुरू कर दिया। ऐसे में एक बंदी दूसरे बंदी के मोबाइल के विषय में जानकारी देता गया और पुलिस को कामयाबी मिलती गई। मुखबिरी करने से नाराज बंदी आपस में ही मारपीट करने लगे।
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